Tulsi Gabbard Resigns: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में हुए बड़े फेरबदल के तहत अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया है। गबार्ड ने शुक्रवार को ओवल ऑफिस में हुई बैठक के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप को अपने फैसले की जानकारी दी।
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, गबार्ड ने अपने इस्तीफे में लिखा, “मेरे पति अब्राहम को हाल ही में हड्डियों के कैंसर के एक अत्यंत दुर्लभ प्रकार का पता चला है।” उन्होंने कहा, “इस समय, मुझे सार्वजनिक सेवा से हटकर उनके साथ रहना होगा और इस कठिन लड़ाई में उनका पूरा समर्थन करना होगा।” हालांकि, इस मामले से परिचित एक व्यक्ति ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि व्हाइट हाउस ने गबार्ड को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया था।
गबार्ड ने अपने पति को अपने 11 साल के वैवाहिक जीवन में अपना सहारा बताया और कहा कि उनके बल और प्रेम ने उन्हें सैन्य तैनाती, राजनीतिक अभियानों और डीएनआई के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान सहारा दिया। उन्होंने कहा कि वे अंतरात्मा की आवाज के साथ उनसे यह नहीं कह सकतीं कि वे अकेले ही इस बीमारी का सामना करें जबकि वह इस पद पर बनी रहें।
फॉक्स न्यूज के अनुसार, अपने इस्तीफे पत्र में गबार्ड ने खुफिया विभाग का पद सौंपने के लिए ट्रंप को धन्यवाद दिया और कहा कि पिछले डेढ़ साल से ओडीएनआई (ODNI) का नेतृत्व करने का अवसर मिलने के लिए वह बेहद आभारी हैं।
कौन हैं तुलसी गबार्ड?
साल 1981 में अमेरिकी समोआ में तुलसी का जन्म माइक गबार्ड और कैरल गबार्ड के घर पर हुआ। वह गबार्ड दंपती की पांच संतानों में से एक हैं। 1983 में जब गबार्ड दो साल की थीं तो उनका परिवार अमेरिका के हवाई राज्य में आकर बस गया था। हवाई में आने के बाद उनकी मां कैरल ने हिन्दू धर्म अपना लिया जबकि उनके पिता रोमन कैथोलिक ईसाई थे। हिन्दू धर्म के प्रभाव के कारण ही कैरल ने अपने बच्चों के हिन्दू नाम रखे। तुलसी गबार्ड खुद को हिन्दू बताती हैं, लेकिन वो भारतीय मूल की नहीं हैं।
तुलसी के पिता पहले रिपब्लिकन पार्टी (2004-2007) और फिर साल 2007 से डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े हैं। साल 2013 में तुलसी पहली बार हवाई राज्य से सांसद चुनी गईं और 2021 तक वो इस पद पर रहीं।
राजनीति के अलावा तुलसी गबार्ड दो दशकों से अधिक समय से आर्मी नेशनल गार्ड से जुड़ी हुई हैं और इस दौरान वो इराक़ और कुवैत जैसे देशों में काम कर चुकी हैं। उन्होंने 2016 के चुनाव से पहले उन्होंने बर्नी सैंडर्स के लिए प्रचार किया और जो बाइडन को समर्थन देने से पहले उन्होंने 2020 में राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेट उम्मीदवार के रूप में दावेदारी पेश की थी।
गबार्ड अमेरिकी संसद की पहली हिंदू सदस्य थीं और उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान सरकार द्वारा संचालित स्वास्थ्य सेवा, मुफ़्त कॉलेज ट्यूशन और गन कंट्रोल जैसे उदारवादी मुद्दों का समर्थन किया था।
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