अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बीजिंग में हुई अहम द्विपक्षीय बैठक ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के साथ पुराने रिश्तों और भरोसे को याद करते हुए भविष्य में भी मजबूत साझेदारी की उम्मीद जताई। हालांकि भव्य स्वागत और गर्मजोशी के बावजूद व्यापार, ताइवान और ईरान जैसे बड़े मुद्दों पर किसी ठोस सफलता की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है।

बैठक के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने शी जिनपिंग से कहा कि दोनों देशों का रिश्ता काफी पुराना और मजबूत रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच किसी भी राष्ट्रपति स्तर पर इतना लंबा व्यक्तिगत संबंध पहले कभी नहीं रहा। ट्रंप ने कहा कि जब भी दोनों देशों के सामने कोई मुश्किल आई, तो उन्होंने आपसी बातचीत से उसे जल्दी सुलझा लिया। उन्होंने भरोसा जताया कि अमेरिका और चीन का भविष्य भी साथ मिलकर बेहतर दिशा में आगे बढ़ सकता है।

ट्रंप बोले- हमारा रिश्ता बहुत ही शानदार है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “आप और मैं एक-दूसरे को अब काफी लंबे समय से जानते हैं। असल में, हमारे दोनों देशों के बीच किसी भी राष्ट्रपति और राष्ट्रपति के बीच यह अब तक का सबसे लंबा रिश्ता है। मेरे लिए, यह एक सम्मान की बात है। हमारा रिश्ता बहुत ही शानदार रहा है। हमारी आपस में खूब बनी है। जब भी कोई मुश्किलें आईं, तो हमने मिलकर उन्हें सुलझाया। मैं आपको फोन करता था और आप मुझे फोन करते थे। जब भी हमें कोई समस्या हुई, हमने उसे बहुत जल्दी सुलझा लिया, हमारा भविष्य भी एक साथ बहुत ही शानदार होने वाला है…”

वहीं, शी जिनपिंग ने ट्रंप का चीन में दोबारा स्वागत करते हुए कहा कि नौ साल बाद उनकी यह यात्रा बेहद अहम समय पर हो रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया इस मुलाकात पर नजर बनाए हुए है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय हालात तेजी से बदल रहे हैं और वैश्विक माहौल अस्थिर बना हुआ है। शी ने कहा कि दुनिया एक नए मोड़ पर खड़ी है और अब यह देखना होगा कि क्या चीन और अमेरिका आपसी टकराव से बचते हुए बड़े देशों के संबंधों का नया मॉडल तैयार कर सकते हैं।

बीजिंग पहुंचने पर ट्रंप का बेहद भव्य स्वागत किया गया। तियानआनमेन स्क्वायर स्थित ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान तोपों की सलामी दी गई और सैन्य बैंड ने अमेरिकी राष्ट्रगान बजाया। ट्रंप और शी जिनपिंग ने साथ मिलकर सैन्य सम्मान गार्ड का निरीक्षण भी किया। पूरे इलाके को सुरक्षा कारणों से खाली कराया गया था और वहां केवल अधिकारी, मीडिया प्रतिनिधि और सैन्यकर्मी मौजूद थे।

स्वागत समारोह के दौरान रंग-बिरंगे परिधानों में सजे सैकड़ों स्कूली बच्चों ने दोनों नेताओं का अभिनंदन किया। बच्चियों ने फूल लहराए जबकि बच्चों ने अमेरिका और चीन के झंडे हाथ में लेकर दोनों नेताओं का स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता शुरू हुई। ट्रंप अपने दौरे के दौरान 15वीं शताब्दी के ऐतिहासिक धार्मिक स्थल टेंपल ऑफ हेवन भी जाएंगे और दोनों नेता एक राजकीय भोज में भी शामिल होंगे।

व्हाइट हाउस का कहना है कि ट्रंप इस यात्रा में केवल औपचारिकता निभाने नहीं गए हैं, बल्कि व्यापार से जुड़े कुछ अहम समझौतों पर भी नजर है। माना जा रहा है कि चीन अमेरिकी सोयाबीन, बीफ और विमान खरीदने को लेकर कुछ घोषणाएं कर सकता है। साथ ही दोनों देश व्यापारिक मतभेदों को सुलझाने के लिए एक संयुक्त ट्रेड बोर्ड बनाने पर भी चर्चा कर रहे हैं।

हालांकि इस यात्रा के दौरान ईरान का मुद्दा भी प्रमुख बना हुआ है। अमेरिका और इजरायल के साथ जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ है और तेल-गैस की कीमतों में तेजी आई है। अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान पर दबाव बनाए, क्योंकि चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ट्रंप चीन को ईरान संकट सुलझाने में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए मनाने की कोशिश करेंगे।

इसके अलावा ताइवान को लेकर भी दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। अमेरिका ने ताइवान के लिए 11 अरब डॉलर के हथियार पैकेज को मंजूरी दी है, जिससे चीन नाराज है। ट्रंप प्रशासन ताइवान के साथ चिप निर्माण और व्यापारिक सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है। इसी कारण यह बैठक वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।