अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि वो परमाणु को लेकर रुकी हुई बातचीत पर जल्दी कोई कदम उठाए। ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि समय बहुत तेजी से निकल रहा है। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, “ईरान के लिए समय तेजी से निकल रहा है, बेहतर होगा कि वो जल्द कोई एक्शन लें अन्यथा उनके पास कुछ भी नहीं बचेगा। यह समय बेहद महत्वपूर्ण है।”

ट्रंप की यह टिप्पणी उस समय आई जब ईरानी मीडिया ने अमेरिका के उन कथित प्रस्तावों का खुलासा किया, जिन्हें परमाणु वार्ता दोबारा शुरू करने की शर्त बताया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका चाहता है कि ईरान लगभग 400 किलोग्राम इनहैंस्ड यूरेनियम उन्हें सौंप दे, केवल एक परमाणु केंद्र तक अपनी गतिविधियां सीमित करे और युद्ध मुआवजे की मांग छोड़ दे।

साथ ही अमेरिका यह भी चाहता है कि ईरान की अधिकांश फ्रीज्ड असेट फिलहाल फ्रीज ही रहें और संघर्ष का अंत बातचीत पूरी होने के बाद ही माना जाए।

ईरान ने भी रखीं शर्तें

वहीं, ईरान ने भी बातचीत में लौटने के लिए अपनी शर्तें रखी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार तेहरान ने क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई बंद करने, प्रतिबंध हटाने और फ्रीज्ड असेट जारी करने की मांग की है। इसके अलावा उसने युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा और होर्मुज जलमार्ग पर अपने नियंत्रण को मान्यता देने की बात भी कही है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका और इजरायल पर आरोप लगाया कि वे सशस्त्र समूहों को समर्थन देकर ईरान में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रयास इसलिए विफल हो गया क्योंकि पड़ोसी देशों ने अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने दिया।

गौरतलब है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता से अप्रैल में हुए युद्धविराम के बावजूद क्षेत्र में तनाव अब भी बना हुआ है। हालांकि, संघर्षविराम के बाद हिंसा में कमी आई। लेकिन दोनों पक्ष अब तक किसी बड़े समझौते पर सहमत नहीं हो सके हैं। ट्रंप ने इससे पहले कहा था कि युद्धविराम पाकिस्तान के अनुरोध पर किया गया।

उन्होंने कहा, “हमने संघर्षविराम एक दूसरे देश के अनुरोध पर किया। हमने पाकिस्तान के लिए यह कदम उठाया।” मालूम हो कि पिछले सप्ताह दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे के प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद से वार्ता ठप पड़ी हुई है।

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अमेरिका और ईरान के बीच जारी मध्यस्थता प्रयासों पर सवाल उठाते हुए रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने मंगलवार को पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि उन्हें इस्लामाबाद पर “बिल्कुल भरोसा नहीं” है। पाकिस्तान की भूमिका पर संदेह जताते हुए उन्होंने कहा कि वाशिंगटन को ईरान के साथ किसी भी संभावित समझौते के लिए किसी दूसरे मध्यस्थ की तलाश करनी चाहिए। पूरी खबर पढ़ें…