अमेरिकी गृह विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के आप्रवासन पर सख्ती के बाद जून व जुलाई, 2025 में भारतीय विद्यार्थियों को जारी किए गए एफ-1 वीजा की संख्या वर्ष 2024 के मुकाबले 69 फीसद कम हो गई। पिछले वर्ष जून और जुलाई में भारतीयों को 12,776 एफ-1 वीजा जारी किए गए थे, जो 2024 में इन्हीं महीनों के 41,336 के आंकड़े के एक तिहाई से भी कम है।

अमेरिकन विश्वविद्यालयों में सेमेस्टर अगस्त-सितंबर में शुरू होता है और पिछले वर्षों के आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीयों को जारी किए गए एफ-1 वीजा की संख्या जून या जुलाई में सबसे अधिक होती है। पिछले वर्ष अकादमिक सत्र से पहले, यह आंकड़ा जून 2025 में सबसे अधिक 10,695 पर पहुंच गया था और फिर जुलाई में गिरकर 2,081 और अगस्त में 2,389 हो गया।

2024 में, जून में सबसे अधिक महीने का आंकड़ा 26,731 था और जून 2023 में यह 40,224 था। कोरोना महामारी के वर्षों में एफ-1 वीजा जारी करने में तेजी आई, जो जून और जुलाई 2021 में 40,194 से बढ़कर 2022 में उन्हीं महीनों में 62,229 और 2023 में 72,027 हो गई। अमेरिकी गृह विभाग के वीजा जारी करने के मासिक आंकड़ों से पता चलता है कि 2023 में इस सर्वोच्च स्तर पर था। ट्रंप के राष्ट्रपति पद संभालने से पहले ही जून और जुलाई 2024 में गिरकर 41,336 हो गया था।

इस सप्ताह जून, जुलाई और अगस्त के लिए महीने के वीजा जारी करने के आंकड़े जारी किए गए। चीन में भी जून और जुलाई 2025 में एफ-1 वीजा में गिरावट देखी गई। हालांकि, 2024 की तुलना में यह गिरावट लगभग 56 फीसद कम है। पिछले वर्ष जून और जुलाई में चीन के विद्यार्थियों को अधिक एफ-1 वीजा मिले।

भारतीय विद्यार्थियों को मिले 12,776 वीजा की तुलना में चीन के विद्यार्थियों को 17,025 वीजा मिले। पिछली बार इन महीनों में चीन के विद्यार्थियों को अधिक एफ-1 वीजा वर्ष 2021 में मिले थे। तब से लेकर अब तक, एफ-1 वीजा पाने वाले भारतीय विद्यार्थियों की संख्या अधिक रही है। उदाहरण के लिए जून और जुलाई 2023 में अंतर बहुत अधिक था। वर्ष 2023 में जहां भारतीय विद्यार्थियों को 72,000 से अधिक एफ-1 वीजा जारी किए गए, वहीं चीन के लिए यह आंकड़ा 42,854 था।