अमेरिका ने ईरान के खार्ग द्वीप पर भीषण बमबारी की है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे मध्य-पूर्व के इतिहास की सबसे शक्तिशाली बमबारी करार दिया है। उन्होंने दावा किया है कि खार्ग द्वीप पर मौजूद सभी सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया गया है।
खार्ग द्वीप को ईरान की तेल लाइफलाइन कहा जाता है। इसके आकार की बात करें तो यह एक 20 वर्ग किलोमीटर का एक छोटा सा द्वीप है। इसकी चौड़ाई करीब 3 मील और लंबाई 7 मील है। यह ईरान के बुशेहर प्रांत के तट से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित एक महत्वपूर्ण द्वीप है। इस द्वीप पर ज्यादा लोग नहीं रहते। यहां की आबादी करीब 3,000 से 5,000 के बीच है। यहां रहने वालों में मछुआरे, ईरान की नेशनल ऑयल कंपनी के कुछ कर्मचारी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के सैनिक शामिल हैं।
खार्ग द्वीप क्यों है ईरान की लाइफलाइन?
ईरान के लगभग 90% तेल निर्यात के लिए यही द्वीप मुख्य एक्सपोर्ट टर्मिनल का काम करता है। वेबसाइट tankertracker.com के आंकड़ों के मुताबिक, ईरान ने 28 फरवरी से लगातार प्रतिदिन 1.01 मिलियन से 1.5 मिलियन बैरल के करीब तेल निर्यात किया है। 1984 की एक डीक्लासिफाइड CIA रिपोर्ट में भी कहा गया था कि ईरान के लिए खार्ग द्वीप बेहद महत्वपूर्ण है। इस द्वीप पर मौजूद तेल सुविधाएं ईरान की पेट्रोलियम प्रणाली का सबसे अहम हिस्सा हैं।
खार्ग द्वीप की खासियत
विशेषज्ञ बताते हैं कि इस द्वीप पर तेल भंडारण की क्षमता काफी अधिक है। यहां तक आने वाली पाइपलाइनों का नेटवर्क ईरान के कई बड़े तेल और गैस क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। इसके बाद तेल समुद्री मार्ग के जरिए बड़े टैंकरों तक पहुंचाया जाता है। खार्ग द्वीप से ही बड़े तेल टैंकरों में लाखों बैरल तेल लोड किया जाता है। ईरान के लगभग सभी तेल निर्यात यहीं से होते हैं। इस द्वीप से ईरान हर साल लगभग 40 से 60 अरब डॉलर की कमाई करता है। इस पैसे का इस्तेमाल सैन्य बजट, क्षेत्रीय सहयोगी संगठनों और कई रणनीतिक कार्यक्रमों में किया जाता है।
ईरान को क्या नुकसान?
अगर इस द्वीप को निशाना बनाया जाए या किसी कारण से यह बंद हो जाए, तो ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है। चिंता की बात यह भी है कि खार्ग द्वीप से निकलने वाला तेल दुनिया की कुल आपूर्ति का लगभग 2 से 3 प्रतिशत हिस्सा माना जाता है। ऐसे में अगर यहां हमला होता है, तो इसका असर पूरी दुनिया के तेल बाजार पर पड़ सकता है।
ट्रंप का क्या प्लान?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस द्वीप को लेकर हमेशा से ही विचार अलग रहे हैं। 1988 में दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान के साथ तनाव बढ़ता है, तो अमेरिका को खार्ग द्वीप पर कब्जा कर लेना चाहिए। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर अमेरिका खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की कोशिश करता है, तो ईरान जवाबी कार्रवाई करते हुए कई दूसरे देशों के तेल ठिकानों को भी निशाना बना सकता है। इसके अलावा सऊदी अरब की तेल सुविधाएं भी खतरे में पड़ सकती हैं।
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