अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को अचानक बड़ा दावा करते हुए कहा कि ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमले रद्द कर दिए गए हैं। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में एक समझौते पर सहमति बन गई है और अब दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। यह बयान ऐसे समय आया जब सिर्फ कुछ घंटे पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर और भी भारी बमबारी करने और उसके तेल निर्यात केंद्र खार्ग आइलैंड पर नियंत्रण की बात कही थी।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच जिन “अंतिम बिंदुओं” पर सहमति बनी है, उन्हें कई देशों की सहमति भी मिली है। उन्होंने दावा किया कि इस समझौते में अमेरिका के साथ-साथ इजराइल, सऊदी अरब, यूएई, कतर, तुर्की, पाकिस्तान, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और मिस्र जैसे देश भी शामिल हैं। ट्रंप के अनुसार, ईरान की सर्वोच्च नेतृत्व टीम तक बातचीत पहुंच चुकी है और सभी पक्षों की मंजूरी के बाद ही हमलों को रोकने का फैसला लिया गया है।

हालांकि ट्रंप ने यह भी साफ किया कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी अभी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि जब तक यह समझौता पूरी तरह लागू नहीं हो जाता, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरानी बंदरगाहों पर समुद्री रोक जारी रहेगी। ट्रंप ने इसे “अस्थायी लेकिन जरूरी कदम” बताया।

यह घोषणा उस समय आई है जब पिछले कुछ दिनों से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेजी से बढ़ रहा था और दोनों पक्षों की सैन्य कार्रवाई ने खाड़ी क्षेत्र में बड़े युद्ध की आशंका पैदा कर दी थी। लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के बाद हालात बेहद नाजुक हो गए थे।

लेकिन इस अचानक आए बयान ने स्थिति को और उलझा दिया है, क्योंकि ईरान की तरफ से इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि ऐसा कोई समझौता हुआ ही नहीं है और न ही किसी सैन्य कार्रवाई को रोकने पर सहमति बनी है। इससे साफ है कि दोनों देशों के बयानों में बड़ा अंतर है और स्थिति को लेकर भ्रम और बढ़ गया है।

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि अगर तनाव सच में कम होता है तो यह बड़ी राहत होगी, लेकिन अगर बयान सिर्फ राजनीतिक दावे साबित हुए तो खाड़ी क्षेत्र में हालात फिर से तेजी से बिगड़ सकते हैं।

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पश्चिम एशिया में ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल के युद्ध की आग की चपेट में अब वैसे देश और लोग भी आने शुरू हो चुके हैं, जो पूरी तरह तटस्थ हैं और वे सिर्फ जरूरी आपूर्ति सुनिश्चित करने की उम्मीद में उस क्षेत्र में मौजूद हैं। कायदे से आम लोगों की जरूरतों के मद्देनजर अपनी ड्यूटी करने वाले अन्य देशों के लोगों को किसी भी पक्ष की ओर से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए, लेकिन हाल में अमेरिका ने इस मामले में जिस स्तर की लापरवाही और मनमानी दिखाई है, उससे यही लगता है कि उसे सामान्य स्थिति के बहाल होने की कोई फिक्र नहीं है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक