Bangladesh News: बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होने वाले हैं। इससे पहले अमेरिका और बांग्लादेश 9 फरवरी को एक ट्रेड डील पर साइन करने वाले हैं। इस समझौते की शर्तों को सीक्रेट रखने की वजह से इसकी काफी आलोचना हुई। भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद बांग्लादेश ने समझौते को अंतिम रूप देने के लिए तेजी से प्रयास किए हैं।

बांग्लादेश को डर है कि अगर उसे भारत जैसी या उससे बेहतर शर्तें नहीं मिलीं, तो अमेरिका के बाजार में उसका हिस्सा कम हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था काफी हद तक रेडीमेड कपड़ों (RMG) के निर्यात पर निर्भर है। अमेरिका को होने वाले उसके कुल निर्यात में लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ कपड़ों का ही है।

गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल ढाका पर टैरिफ 37 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया था। आगामी व्यापार समझौते में शुल्क को और घटाकर 15 प्रतिशत करने की उम्मीद है। इसके अलावा 2025 के मध्य में, मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने अमेरिका के साथ एक नॉन डिस्क्लोजर एग्रीमेंट पर साइन किए। इस समझौते का कोई भी ड्राफ्ट न तो जनता, न ही संसद और न ही इंडस्ट्री होल्डर्स के साथ शेयर किया गया है।

डील में अमेरिकी शर्तें

प्रोथोम आलो के अनुसार, पिछले साल अगस्त में कॉमर्स एडवाइजर एसके बशीर उद्दीन ने कहा था, “समझौते में ऐसा कुछ भी नहीं होगा जो देश के हितों के खिलाफ हो। अमेरिका की सहमति के अधीन, इसे सार्वजनिक भी किया जाएगा।” समझौते में कई शर्तें हैं। पहली शर्त यह है कि चीन से आयात कम किया जाए और चीन के बजाय अमेरिका से सैन्य आयात बढ़ाया जाए। दूसरी शर्त यह है कि अमेरिकी आयात बांग्लादेश में बिना किसी रोक-टोक के प्रवेश कर सके और दक्षिण एशियाई देश को बिना कोई सवाल उठाए अमेरिकी स्टैंडर्ड को स्वीकार करना होगा। अमेरिका से इंपोर्ट वाहनों और पुर्जों की जांच नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि वाशिंगटन बांग्लादेश के बाजार में अपने वाहनों की आसान पहुंच चाहता है।

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सीपीडी की एक फेमस फेलो देवप्रिया भट्टाचार्य ने प्रोथोम आलो को बताया कि ट्रेड डील पारदर्शी नहीं है, क्योंकि इसके फायदे और नुकसान का आकलन करने का कोई अवसर नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा, “अगर चुनाव के बाद टैरिफ एग्रीमेंट पर साइन किए गए होते, तो राजनीतिक दल इस पर चर्चा कर सकते थे। क्या आने वाली निर्वाचित सरकार के हाथ बंधे हुए हैं।”

बांग्लादेश में नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी

बांग्लादेश हर साल अमेरिका को भारी मात्रा में कपड़े बेचता है (लगभग 7 से 8.4 अरब डॉलर)। यह बांग्लादेश द्वारा अमेरिका को भेजे जाने वाले कुल सामान का लगभग 96 प्रतिशत है। इसके उलट बांग्लादेश अमेरिका से केवल लगभग 2 अरब डॉलर का सामान खरीदता है। व्यापार नियमों में कोई भी बदलाव बांग्लादेश के लिए बहुत मायने रखता है क्योंकि अमेरिका उसका एक बड़ा ग्राहक है।

चूंकि भारत और बांग्लादेश कपड़ों जैसे समान प्रोडक्ट्स बेचते हैं, इसलिए भारत में कम कर होने से अमेरिकियों के लिए भारतीय कपड़े सस्ते हो जाएंगे। अगर बांग्लादेश की सीक्रेट डील भारत के 18 प्रतिशत टैक्स के बराबर या उससे कम नहीं होता है, तो अमेरिकी खरीदार अपने ऑर्डर भारत की ओर मोड़ सकते हैं, जिससे लाखों बांग्लादेशी नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी।

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