torture and killing in police custody is common in pakistan, refuegee, minority and landless are more vulnerable-मानवाधिकार संस्था ने खोली पाकिस्‍तानी पुलिस की पोल: पिटाई और यौन शोषण आम बात, रसूखदारों के कहने पर हत्या भी - Jansatta
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मानवाधिकार संस्था ने खोली पाकिस्‍तानी पुलिस की पोल: पिटाई और यौन शोषण आम बात, रसूखदारों के कहने पर हत्या भी

कई पाकिस्तानी पुलिस अधिकारियों ने माना कि रसूखदार लोगों या ऊपर के अधिकारियों के कहने पर फर्जी मुठभेड़ में आरोपी की हत्या कर दी जाती है।

पाकिस्तानी पुलिस ने लाठीचार्ज और हवाई फायरिंग की।((AP File Photo/B.K. Bangash)

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट वाच (एचआरडब्ल्यू) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में पुलिस द्वारा गैर-कानूनी हत्या, उत्पीड़न, अवैध गिरफ्तारी, हिरासत में बदसलूकी और शरणार्थियों, अल्पसंख्यकों और भूमिहीनों के संग भेदभाव किया जाना आम बात है। संस्था ने सोमवार (26 सितंबर) को अपनी 102 पन्नों की रिपोर्ट जारी की। ये रिपोर्ट पाकिस्तान के तीन प्रांतों पंजाब, सिंध और बलूचिस्तान के 30 पुलिस अधिकारियों, 50 पुलिस पीड़ितों, उनके परिवारवालों, अन्य गवाहों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से बातचीत के आधार पर तैयार की गई है। रिपोर्ट में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत को शामिल नहीं किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तानी पुलिस न केवल मानवाधिकारों का हनन करती है बल्कि उस पर नेताओं, समाज के रसूखदार तबके और आम जनता की उम्मीदों का भी दबाव रहता है। रिपोर्ट में कहा गया है, “तीन प्रांतों की पुलिस हिरासत में लिए गए लोगों को अक्सर प्रताड़ित करती है, खास तौर पर आपराधिक मामलों में। कई बार पुलिस के उत्पीड़न से आरोपी की मौत तक हो जाती है।” रिपोर्ट के अनुसार आरोपियों की डंडे और चमड़े की बेल्ट से पिटाई की जाती है। लोहे की रॉड बांधकर उनके पैर फैला दिए जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार पुलिस हिरासत में यौन उत्पीड़न, मानसिक शोषण और लगातार जगाए रखना भी आम बात है।

रिपोर्ट के अनुसार कई पुलिस अधिकारियों ने माना कि कई बार हिरासत में लिए आरोपियों को फर्जी मुठभेड़ में मार दिया जाता है। अधिकारियों के अनुसार ऐसी हत्याएं आम तौर पर प्रभावशाली वर्ग या ऊपर के अधिकारियों के कहने पर की जाती हैं। कई बार आरोपी के खिलाप पर्याप्त सुबूत न मिलने पर भी पुलिस फर्जी मुठभेड़ का सहारा लेती है। रिपोर्ट के अनुसार पुलिस पर ऐसी किसी अपराध की शायद ही कभी सजा मिलती है। रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटिशकालीन कानूनों के कारण नेताओं का हस्तक्षेप और पुलिस द्वारा ताकत का दुरुपयोग संभव हो पाता है।

पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग के जनरल सेक्रेटरी आईए रहमान ने कहा कि अगर खैबर पख्तूनख्वा भी रिपोर्ट में शामिल होता तो बेहतर होता। रहमान ने पाकिस्तानी अखबार डॉन ने से कहा, “पुलिस सुधार के गंभीर प्रयास किए जाने की जरूरत है। लेकिन सरकार सही कदम उठाने के लिए तैयार नहीं नजर आती है।” रहमान ने मांग की कि चुनाव जीतने और दूसरे मकसदों से भी पुलिस का इस्तेमाल करना बंद करना चाहिए।

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