यूरोपीय आयोग की नई टीम, इमिग्रेशन पर लेकर झगड़ा

लाएन के प्रस्ताव में कुछ पुराने उम्मीदवार हैं जो पहले से ही आयोग के सदस्य हैं तो कई नए उम्मीदवार हैं। उनमें कई उम्मीदवार ऐसे हैं जो विवादास्पद हैं। मसलन फ्रांसीसी उम्मीदवार सिल्वी गुलार्ड।

यूरोपीय आयोग की नई प्रमुख जर्मनी की उर्सुला फॉन डेय लाएन। (फोटो-एपी)

यूरोपीय आयोग की नई प्रमुख जर्मनी की उर्सुला फॉन डेय लाएन ने अपनी टीम की घोषणा कर दी है। जैसा कि उन्होंने यूरोपीय संसद में अपने चुनाव के समय वादा किया था, पहली बार आयोग के सदस्यों में करीब करीब लैंगिक समानता है। उसके 27 सदस्यों में 14 पुरुष और 13 महिलाएं हैं। यहां तक तो सब ठीक है लेकिन विवाद फिर भी है। यूरोपीय संघ की ये नई सरकार नवंबर में काम करने लगेगी। लेकिन उससे पहले यूरोपीय संसद में उसका अनुमोदन जरूरी होगा। हालांकि संसद पूरी टीम के बारे में फैसला लेगी लेकिन उससे पहले एक एक उम्मीदवार को संसद की समितियों में सवाल जवाब का सामना करना होगा और वहां कुछ उम्मीदवारों को दिक्कत हो सकती है।

यूरोपीय संघ के आयोग के सदस्यों को चुनने का काम आसान नहीं होता। हर सदस्य देश से एक प्रतिनिधि, पुरुषों और महिलाओं के बीच समानता, संघ के देशों की राजनीतिक स्थिति के अनुरूप संतुलन बनाने की कोशिश और सबसे बढ़कर अनुभवी लोगों की नियुक्ति ताकि आयोग का काम भी चल सके। अपनी टीम का चुनाव करने की जिम्मेदारी होती है आयोग के प्रमुख की, जिसका चुनाव संघ के सदस्य देशों के नेता करते हैं। उर्सुला फॉन डेय लाएन ने अपनी जिम्मेदारी पूरी तो कर दी है लेकिन अब सवाल है कि क्या सभी सदस्यों को संसद का समर्थन मिल पाएगा। इसमें संदेह दिखता है। उर्सुला फॉन डेय लाएन के 26 कमिश्नरों में से तीन फ्रांस टिम्मरमंस, मार्गरेटे फेस्टागर और वाल्डिस डोमब्रोव्सकिस आयोग के उपाध्यक्ष होंगे। स्पेन के जोसेप बोरेल विदेशी मामलों के प्रभारी होंगे।

लाएन के प्रस्ताव में कुछ पुराने उम्मीदवार हैं जो पहले से ही आयोग के सदस्य हैं तो कई नए उम्मीदवार हैं। उनमें कई उम्मीदवार ऐसे हैं जो विवादास्पद हैं। मसलन फ्रांसीसी उम्मीदवार सिल्वी गुलार्ड। वह उदारवादी हैं, पहले यूरोपीय संसद की सदस्य रह चुकी हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों ने उन्हें रक्षा मंत्री बनाया था लेकिन पार्टी में फर्जी नौकरी के आरोपों के बाद उन्होंने एक महीने के अंदर इस्तीफा दे दिया। पोलैंड के उम्मीदवार यानुश वोइचिएचोव्स्की के साथ भी समस्या है। उनके खिलाफ यात्र के गलत बिलों की वजह से धोखाधड़ी की जांच चल रही है। यही हाल हंगरी के लासलो ट्रोचानी का है जो हंगरी के कानून मंत्री हुआ करते थे और इस पद पर रहते हुए उन्होंने न सिर्फ अनुदारवादी लोकतंत्र का प्रचार किया बल्कि वह अपने देश में विवादास्पद न्यायिक सुधारों के जनक रहे हैं। इसी तरह रोमानिया के उम्मीदवार उस सरकार के प्रतिनिधि हैं जिसने भ्रष्टाचार को कानूनी बनाने की कोशिश की।

इस समय सबसे बड़ा विवाद एक विभाग के नाम को लेकर हो रहा है। यह विभाग है आप्रवासन का जो पिछले सालों में यूरोप के सदस्य देशों में आपसी झगड़े का कारण रहा है। उर्सुला फॉन डेय लाएन ने इस विभाग का नाम बदल कर “हमारी यूरोपीय जीवन पद्धति की सुरक्षा” रख दिया है। इस पद की जिम्मेदारी ग्रीस की मार्गरिटिस सीनास को दी गई है और उनका काम आप्रवासन और शरणार्थी नीति का समन्वय करना होगा। लेकिन ये दोनों नाम कहीं नहीं हैं और विभाग का प्रस्तावित नाम इतना अजीब है कि पद छोड़ रहे आयोग प्रमुख जाँ क्लोद युंकर ने भी इसकी आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि उन्हें ये बात अच्छी नहीं लगती कि यूरोपीय जीवनशैली को आप्रवासन के खिलाफ रखा जाए। उन्होंने कहा कि आप्रवासियों को स्वीकार करना यूरोपीय जीवनशैली का हिस्सा रहा है। यूरोपीय संसद में भी इसका विरोध हो रहा है और नाम बदलने की मांग हो रही है। बहुत से सांसदों का आरोप है कि फॉन डेय लाएन धुर दक्षिणपंथियों के सामने झुक गई हैं।

आने वाले हफ्ते में यूरोपीय संसद में आयोग के कमिश्नर पद के उम्मीदवारों पर बहस शुरू होगी। आयोग के नए प्रमुख के सामने ऐसा आयोग पेश करने की चुनौती थी जिसे कई पार्टियों में बंटे संसद का समर्थन मिले। उनका काम 27 कमिश्नरों में काम का बंटवारा ऐसे करने का था जिसे संसद अपना अनुमोदन दे सके। फॉन डेय लाएन ने अपनी ओर से कोशिश की है लेकिन यूरोपीय एकल उम्मीदवारों को मैदान से हटने पर मजबूर कर सकती है। उस स्थिति में संसद के सामने कुछ नए नाम सामने आएंगे। आखिरी फैसला अक्टूबर के अंत में होगा तभी पता चलेगा की यूरोपीय संघ का नया आयोग कैसा होगा।

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