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प्रतिबंधों के बावजूद लश्कर को मिल रहा है धन

संयुक्त राष्ट्र के आतंकवादियों के लिए वित्तीय मदद को खत्म करने की जरूरत पर एक बार फिर जोर देने के साथ भारत ने कहा कि वैश्विक निकाय के प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद लश्कर ए तैयबा जैसे आतंकी समूहों को वित्तीय मदद मिल रही है जिस पर सुरक्षा परिषद को ध्यान देने की जरूरत है। […]

Author December 21, 2014 1:58 PM
पेशावर के स्कूल पर हुए आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान में छह साल से लगी मृत्युदंड की सजा पर लगी पाबंदी को हटा लिया गया था।

संयुक्त राष्ट्र के आतंकवादियों के लिए वित्तीय मदद को खत्म करने की जरूरत पर एक बार फिर जोर देने के साथ भारत ने कहा कि वैश्विक निकाय के प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद लश्कर ए तैयबा जैसे आतंकी समूहों को वित्तीय मदद मिल रही है जिस पर सुरक्षा परिषद को ध्यान देने की जरूरत है।

भारत ने चिंता जताई कि सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध सूची में शामिल होने और यात्रा प्रतिबंध, संपत्तियों की जब्ती और हथियारों की खरीद पर प्रतिबंध का सामना करने के बावजूद आतंकवादी संगठनों को मादक पदार्थों की तस्करी, चोरी, फिरौती और जबरन वसूली के लिए अपहरण के माध्यम से जुटाए जाने वाले गैरकानूनी स्रोतों से वित्तीय मदद मिल रही है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के कार्यवाहक प्रतिनिधि भगवंत बिश्नोई ने आतंकवाद व सीमा पार अपराध विषय पर सुरक्षा परिषद में एक बहस के दौरान गुरुवार को कहा कि किसी आतंकवादी समूह को प्रतिबंधित करने के साथ आतंकवाद पैदा करने वाली जीवन रेखा कट जानी चाहिए। लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा हमेशा नहीं होता।
उन्होंने कहा कि लश्कर प्रतिबंधित संगठन होने के बावजूद इस साल मई में अफगानिस्तान में भारत के वाणिज्य दूतावास पर हमला करने में सक्षम रहा। बिश्नोई ने कहा-लश्कर ए तैयबा को पर्याप्त धनराशि मिल रही है। अफसोस है कि प्रतिबंधों के इस तरह के उल्लंघनों को लेकर ऐसा लगता है कि परिषद की प्रतिबंध समिति शायद ही कुछ कर सकती है। संसाधन जुटाने के अलावा अवैध गतिविधियों से आतंकी नेटवर्क के प्रसार व विकास में मदद मिलती है।

बिश्नोई ने अफगानिस्तान में अफीम की खेती से पैदा होने वाले राजस्व का उदाहरण दिया जिससे तालिबान और दूसरे आतंकवादी नेटवर्क को मदद मिलती है। वित्त पोषित व सुसंगठित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गतिविधियों के प्रसार के बीच परिषद ने सीमा पार अपराध व आतंकवाद के बीच संबंध पर अपनी चिंता जताते हुए एक प्रस्ताव को मंजूरी दी और सीमाओं को सुरक्षित बनाने व अवैध नेटवर्क के खिलाफ अभियोग चलाकर संगठित अंतरराष्ट्रीय अपराध से आतंकवादियों को लाभान्वित होने पर रोक लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई का आह्वान किया।

राजनीतिक मामलों के उपमहासचिव जेफ्री फेल्टमैन ने पेशावर के स्कूल में हुए आतंकी हमले को याद करते हुए कहा कि पाकिस्तान के एक स्कूल में तालिबान के किए गए घिनौने हमले के बाद एक बार फिर इस जरूरत का पता चलता है कि हमें आतंकवाद से मुकाबले के लिए अपने प्रयासों में थकना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि बोको हराम, अल कायदा और तालिबान जैसे आतंकवादी समूहों और उनके नापाक इरादों वाले सहयोगी इस बात को पूरी तरह स्पष्ट कर रहे हैं कि आतंकवाद व सीमा पार अपराधों के बीच व्यापक सहयोग से संघर्षों को बढ़ावा मिलता है।

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