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सर्जिकल स्‍ट्राइक में जो बना था निशाना, पाकिस्‍तान ने उस आंतंकी कैंप को फिर किया आबाद

खास बात यह है कि भारत की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाने वाले पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री इमरान खान के सत्ता संभालने के बाद से इन कैंप में 250 से ज्यादा आतंकियों ने डेरा डाल रखा है।

surgical strike, surgical strike 2018, surgical strike Day 2018, surgical strike India, surgical strike date, surgical strike date 2018, 29 september, 29 september 2018, surgical strike date in india, surgical strike newsतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (पीटीआई फाइल फोटो)

भारतीय सैनिकों की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद बॉर्डर पर आतंकी कैंप एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। पाकिस्तानी आर्मी की मदद से करीब 230 आतंकी भारत में घुसपैठ करने की फिराक में हैं। इसके लिए बकायदा एलओसी के पास पाकिस्तान ने 27 कैंप बनाए हैं, जहां से ये आतंकी भारत में घुसपैठ कर सकते हैं। एनबीटी ने इंटेलिजेंस के एक सूत्र के हवाले से जानकारी देते हुए बताया कि आठ कैंप पिछले एक महीने में स्थापित किए गए हैं। खास बात यह है कि भारत की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाने वाले पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री इमरान खान के सत्ता संभालने के बाद से इन कैंप में 250 से ज्यादा आतंकियों ने डेरा डाल रखा है।

रक्षा सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने लिपा कैंप को फिर से स्थापित कर लिया है। भारतीय सेना ने दो साल पहले सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए इस कैंप को तबाह कर दिया था। वहीं सर्जिकल स्ट्राइक में तबाह हुए बिम्भर गली स्थित दूसरे कैंप को बसाया नहीं जा सका। इंटेलिजेंस अफसर के मुताबिक जिन जगहों पर ये कैंप स्थापित किए गए हैं, उनका खासा भौगोलिक महत्व है। ये आतंकी यहां से दक्षिणी कश्मीर में घुसपैठ की कोशिश में हैं। यहां हंदवाड़ा और हफरूड़ा के जंगलों से घुसपैठ में मदद मिलती है। कहा जा रहा है कि आतंकियों की इस घुसपैठ का मकसद जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव को प्रभावित करना है।

जानकारी के मुताबिक पिछले एक महीने में पीओके यानी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में जो कैंप स्थापित किए गए हैं उनमें लिपा के अलावा चकोठी, बरारकोट, शार्डी, जूरा के कैंपों को आतंकी संगठन लश्कर-ए-तयैबा चला रहा है। इसके अलावा तीन कैंप हिजबुल मुजाहिदीन के हैं। बता दें कि साल 2016 में पोस्टर बॉय आतंकी हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में हिंसा भड़क गई थी। इसी का फायदा उठाने के लिए इन कैंपों की तादाद खासी बढ़ गई।

इस दौरान घाटी में सुरक्षाबलों को अगवा कर उनकी हत्या के मामले में भी सामने आते रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जिस समय आतंकी बुरहान वानी सुरक्षाबलों के हाथों मारा गया उस समय एलओसी के पास 14 कैंपों में 150 से ज्यादा आतंकी डेरा डाले हुए थे।

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