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निम्र को फांसी से लोग गुस्से में, तेहरान में सऊदी दूतावास को आग लगाई

सऊदी अरब के एक शीर्ष शिया धर्मगुरु को फांसी की सजा दिए जाने से गुस्साई भीड़ ने तेहरान में सऊदी अरब के दूतावास को आग लगा दी।

Author तेहरान | January 4, 2016 1:23 AM

सऊदी अरब के एक शीर्ष शिया धर्मगुरु को फांसी की सजा दिए जाने से गुस्साई भीड़ ने तेहरान में सऊदी अरब के दूतावास को आग लगा दी। बाद में पुलिस की मदद से भीड़ को हटाया गया। ईरान के एक अधिकारी ने कहा है कि सऊदी अरब के दूतावास पर हमले और आग लगाने को लेकर 40 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

इरना समाचार एजंसी के मुताबिक ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहाद में प्रदर्शनकारियों ने सऊदी वाणिज्य दूतावास को आग लगा दी। सऊदी अरब में 56 वर्षीय शीर्ष धर्मगुरु निम्र अल निम्र को मौत की सजा के एलान के कुछ घंटों बाद ही सऊदी अरब के दूतावास पर यह हमला हुआ। निम्र वर्ष 2011 से सऊदी अरब में सरकार विरोधी आंदोलन के प्रमुख नेता रहे थे। उन्हें मौत की सजा दिए जाने के बाद ईरान और इराक के शियाओं में काफी गुस्सा है। निम्र उन 47 शिया और सुन्नी लोगों के समूह में से एक हैं जिन्हें शनिवार को आतंकवाद के आरोप में फांसी की सजा दी गई थी।

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संवाद समिति इरना ने बताया कि दूतावास के भीतर आग की लपटें उठ रही थीं। प्रदर्शनकारी दूतावास के अंदर घुस गए, लेकिन उन्हें बाद में वहां से हटा दिया गया। एक चश्मदीद ने कहा-‘हर जगह पुलिस थी और उसने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर दिया। उनमें से कुछ को गिरफ्तार भी कर लिया गया।’ वहां से हटाए जाने से पहले प्रदर्शनकारी दूतावास की छत पर चढ़ गए थे। वेबसाइटों पर दिख रही तस्वीरों में प्रदर्शनकारियों ने सऊदी अरब के झंडे को नीचे उतार दिया।

ईरानी मीडिया ने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुसैन जाबेर अंसारी के हवाले से लिखा है कि पुलिस से कहा गया है कि तेहरान और मशहाद में सऊदी अरब के राजनयिक मिशनों की सुरक्षा की जाए और इन स्थानोें के सामने किसी प्रदर्शन को होने से रोका जाए। शिया बहुल ईरान और सुन्नी बहुल सऊदी अरब में लंबे समय से खींचतान रही है। ईरान ने निम्र को फांसी की सजा दिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सऊदी सरकार आतंकवादी गतिविधियों और चरमपंथियों का समर्थन करती है। लेकिन घरेलू आलोचनाओं का सामना फांसी और दमन से करता है।

जाबेर अंसारी ने हमले से पहले आगाह किया था कि इन नीतियों की सऊदी अरब बड़ी कीमत चुकानी होगी। इसके जवाब में सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने कहा उसने ईरान की इस भड़काऊ टिप्पणी के लिए उसके राजदूत को तलब किया गया है।
ईरान के एक अधिकारी ने कहा है कि सऊदी अरब के दूतावास पर हमले और आग लगाने को लेकर 40 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इरना के अनुसार तेहरान के अभियोजक अब्बास जाफरी दौलत आब्दी ने कहा कि संदिग्धों की पहचान की गई और गिरफ्तार किया गया।

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने शिया धर्मगुरु निम्र को मौत की सजा दिए जाने की निंदा की है लेकिन सऊदी दूतावास और वाणिज्य दूतावास पर प्रदर्शनकारियों के हमले को भी पूरी तरह से अनुचित बताया। रूहानी ने तेहरान और मशहाद में सऊदी दूतावास और वाणिज्य दूतावास को नुकसान पहुंचाने की कार्रवाई को पूरी तरह से अनुचित बताया है। लेकिन रूहानी ने निम्र की हत्या किए जाने को लेकर सऊदी अरब की आलोचना की। उन्होंने एक बयान में कहा-‘मुझे इस बात में कोई शक नहीं है कि सऊदी सरकार ने अपने गैर इस्लामी कार्य से दुनिया के देशों में खासतौर पर इस्लामिक देशों में अपनी छवि पहले की तुलना में कहीं अधिक खराब की है।’ उन्होंने कहा-‘मैं गृहमंत्री से इस हमले के साजिशकर्ता की पहचान करने और उसे अदालत के समक्ष पेश करने की अपील करता हूं।’

इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनी ने सऊदी अरब में एक शिया धर्मगुरु को मौत की सजा दिए जाने को लेकर सऊदी अरब की सरकार को ‘बदले’ की चेतावनी दी तो दूसरी ओर रियाद ने तेहरान पर आतंकवाद का समर्थन करने का आरोप लगाया। इस मुद्दे को लेकर सऊदी अरब और ईरान के बीच जुबानी जंग तेज हो गई। खामेनी ने अपनी वेबसाइट पर बयान जारी कहा कि अल-निम्र ने न तो लोगों को हथियार उठाने के लिए आमंत्रित किया और न ही खुफिया साजिश रची। उन्होंने सिर्फ सार्वजनिक तौर पर आलोचना की। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस निंदा से ईरान आतंकवाद के समर्थन में नुमाइंदगी करने वाले असली चेहरे को उजागर कर दिया है। तेहरान में सऊदी अरब के दूतावास के बाहर लोग जमा हुए और सऊदी अरब के खिलाफ नारेबाजी की। कुछ प्रदर्शनकारियों ने दूतावास पर पत्थर भी फेंके।
दूसरी ओर इराकी शहर नजफ में इराक के सर्वोच्च शिया धर्मगुरु अयातोल्ला अली अल सिस्तानी ने निम्र को फांसी दिए जाने को हिंसक कार्रवाई करार दिया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में हमारे भाइयों के एक समूह की शहादत की दुखद खबरें हमें मिली। सिस्तानी ने कहा कि दिवंगत धर्मगुरू शेख निम्र अल निम्र सहित उनका रक्त बहना एक अन्नाय और हिंसक कार्य है। इराक में एक अन्य प्रमुख शिया धर्मगुरू ने भी सउदी अधिकारियों द्वारा निम्र और अन्य शिया कार्यकर्ताओं को मौत की सजा दिए जाने पर रोष जताया है।

सराया अल सलाम मिलीशिया का नेतृत्व करने वाले एक जाने माने धर्मगुरु मुक्तदा अल सद्र ने बताया कि निम्र को मौत की सजा दिया जाना शियाओं के खिलाफ एक खौफनाक हमला है और इसकी अंतरराष्ट्रीय निंदा की अपील की।
वहीं, शियाओं के पवित्र शहर करबला आधारित एक धर्मगुरू मोहम्मद तकी अल मुदारेसी ने कहीं अधिक तीखी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा कि निम्र को मौत की सजा दिया दिया जाना न सिर्फ शियाओं के खिलाफ बल्कि सभी मुसलमानों के खिलाफ युद्ध की घोषणा है।

 

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