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तेहरान हमला: ईरान, सीरिया में आईएस का हिस्सा थे पांचों आतंकवादी

ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद जरीफ ने तेहरान में हुए हमलों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों की गुरुवार को निंदा की।

Author Updated: June 8, 2017 8:46 PM
तेहरान स्थित ईरानी संसद के परिसर में हुए आतंकी हमले में 17 लोगों की जान चली गई। (Photo: PTI)

ईरान के खुफिया मंत्रालय ने गुरुवार (8 जून) को कहा कि तेहरान में दोहरा आतंकी हमला करने वाले लोग ईरानी नागरिक ही थे जो इराक और सीरिया में आतंकी समूह इस्लामिक स्टेट में शामिल हुए थे और पिछले साल गर्मियों में वापस देश लौटे थे। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘पांच ज्ञात आतंकवादी आतंकी समूह दायेश (आईएस) में शामिल होने के बाद देश छोड़कर चले गए और उन्होंने मोसुल (इराक) एवं रक्का (सीरिया) में इस आतंकी समूह द्वारा अंजाम दिए गए अपराधों में हिस्सा लिया था।’’

बयान में संकेत दिए गए कि कल हुए दोहरे हमले को पांच लोगों ने अंजाम दिया। पहले ऐसी खबरें आयी थीं कि हमले में छह आतंकी शामिल थे। मंत्रालय ने मृत हमलावरों की तस्वीरें एवं नाम सार्वजनिक कीं जिन्होंने कल तेहरान स्थित ईरानी संसद (मजलिस) के परिसर और आयतुल्ला रूहोल्ला खोमैनी के मकबरे पर कल हमला कर 17 लोगों की जान ले ली थी और दर्जनों अन्य को घायल कर दिया था।

बयान के अनुसार पांचों उस नेटवर्क का हिस्सा थे जो दायेश के शीर्ष स्तर के कमांडर अबु आयशा के नेतृत्व में जुलाई-अगस्त, 2016 में ईरान में घुसे थे और धार्मिक शहरों में आतंकी अभियानों को अंजाम देना चाहते थे। इसमें कहा गया कि अबु आयशा को मार गिराया गया था और नेटवर्क को देश से भागने पर मजबूर कर दिया गया था। यह साफ नहीं हुआ है कि कल हुए हमल से पहले ये पांचों आतंकी ईरान कब लौटे।

वहीं ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद जरीफ ने तेहरान में हुए हमलों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों की गुरुवार को निंदा की। हमले में 17 लोगों को मौत हुई है। जरीफ ने गुरुवार को ट्वीट किया, “ईरान जब अमेरिकी असामियों द्वारा समर्थित आतंकवाद से लड़ रहा है, ऐसे में व्हाइट हाउस के घृणास्पद बयान और सीनेट के प्रतिबंध आए थे। ईरान के लोग दोस्ती के ऐसे दावों को खारिज करते हैं।”

एफे न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने बुधवार को आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट द्वारा तेहरान पर किए गए दोहरे हमलों की निंदा करने के साथ ही जोर देकर यह भी कहा था कि ‘आतंकवाद प्रायोजक देशों के लिए खुद भी इस बुराई का शिकार बनने का खतरा होता है।’

मंत्री ने कहा कि सऊदी अरब समेत अमेरिका के सहयोगी आतंकवाद के असली प्रायोजक हैं, जिनके साथ ट्रंप ने कई अरब डॉलर का शस्त्र समझौता किया है। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों ने उसी को निशाना बनाया ‘जिससे उनके स्वामी सबसे अधिक घृणा करते हैं और वह है लोकतंत्र का सदन।’

देखिए वीडियो - ईरान की संसद पर हमला: फायरिंग में 8 लोग घायल, एक गार्ड की मौत

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