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टीबी ने ली 15 लाख लोगों की जान

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट बताती है कि 2014 में इस बीमारी से 15 लाख लोगों की मौत हुई है। दुनिया में जानलेवा बीमारियों में एचआइवी के..

Author संयुक्त राष्ट्र | October 30, 2015 12:07 AM

भारत में पिछले साल तदेपिक (टीबी) के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट बताती है कि 2014 में इस बीमारी से 15 लाख लोगों की मौत हुई है। दुनिया में जानलेवा बीमारियों में एचआइवी के साथ इस रोग का भी नंबर आता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की बुधवार को जारी हुई वैश्विक तदेपिक रिपोर्ट 2015 के मुताबिक, 2014 में टीबी के 96 लाख नए मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 58 फीसदी मामले दक्षिण-पूर्वी एशिया और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र से थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर 2014 में कुल सामने आए मामलों में, भारत, इंडोनेशिया और चीन में टीबी के सबसे ज्यादा मामले सामने आए जो कि क्रमश: 23 फीसद, 10 फीसद और 10 फीसद हैं। पिछले साल नाइजीरिया, पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका में भी टीबी के मामलों की संख्या ज्यादा रही है। रिपोर्ट बताती है कि पिछले साल तकरीबन 15 लाख लोगों की इस बीमारी की वजह से मौत हुई जिनमें 140,000 बच्चे शामिल थे।

इसमें कहा गया है कि इनमें अधिकतर मौतों को रोका जा सकता था। दुनिया में जानलेवा बीमारियों में एचआइवी के साथ इस रोग का भी नंबर आता है। रिपोर्ट ने कहा कि भारत और नाइजीरिया में टीबी से होने वाली मौतें वैश्विक तौर पर इस बीमारी से होने वाली मौतों का एक तिहाई है। दोनों में एचआइवी पीड़ितों को शामिल किया गया है और निकाला गया है।

टीबी से होने वाली कुल मौतों में से करीब 90 फीसदी (एचआइवी निगेटिव और एचआइवी पॉजिटिव दोनों तरह के लोगों में से) और एचआइवी निगेटिव लोगों में से टीबी की 80 फीसदी मौतें 2014 में अफ्रीकी देशों और दक्षिण-पूर्वी एशिया में हुई हैं। रिपोर्ट बताती है कि विश्व भर में टीबी से होने वाली कुल मौतों में से करीब एक तिहाई भारत और नाइजीरिया में होती हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2015 में वैश्विक स्तर पर टीवी का प्रसार 1990 की तुलना में 42 फीसदी कम हुआ है।

वर्ष 1990 की तुलना में टीबी के मामलों को आधा करने का लक्ष्य विश्व स्वास्थ्य संगठन के तीन क्षेत्रों में हासिल किया गया है जो अमेरिकी क्षेत्र, दक्षिण-पूर्वी एशिया क्षेत्र और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में और टीबी के अधिक प्रभावित देशों ब्राजील, कंबोडिया, चीन, इथोपिया, भारत, म्यामां, फिलिपीन, युगांडा, और वियतनाम हैं। 2007 के बाद से वर्ष 2014 में वैश्विक तौर पर टीबी के मामलों में काफी वृद्धि सामने आई।

सालाना तौर पर टीबी के नए मामले, जो 2013 तक 57 लाख थे, वो 2014 में मामूली बढ़ोतरी के साथ बढ़कर 60 लाख से ज्यादा हो गए। इसकी वजह भारत में टीबी के मामलों में 29 फीसदी वृद्धि है क्योंकि मई 2012 में अनिवार्य सूचना देने की नीति अपनाई गई थी। इससे जून 2012 में राष्ट्रीय वेब आधारित रिपोर्टिंग तंत्र स्थापित किया गया था और निजी स्वास्थ्य क्षेत्र को शामिल करने के प्रयासों को तेज किया गया था। रिपोर्ट कहती है कि भारत में जिस तरह के गहन प्रयास पहले ही शुरू किए जा चुके हैं उनके जरिए यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि सारे मामले पकड़ में आएं और राष्ट्रीय निगरानी तंत्र में अधिसूचित किए जाएं और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार उनका इलाज हो।

इसमें कहा गया है कि टीबी के मामलों को कम करने के लिए सामने आए मामलों और उपचार के बीच जो अंतर है उसे कम करने की जरूरत है और वित्त पोषण की कमियों को पूरा करने और नए निदान उपाय, दवा और टीके विकसित करने की जरूरत है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रभावित निदान और उपचार ने 2000 से 2015 के बीच 4.3 करोड़ लोगों की जान बचाई है। यह रिपोर्ट विश्व स्वास्थ्य संगठन की वार्षिक आकलन शृंखला की 20वीं रिपोर्ट है।

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