अफगानिस्तान के विश्वविद्यालयों में लड़के और लड़कियों को आंख मिलाने की इजाजत नहीं, शिफ्ट में चलेंगी क्लासेस, रूम में लगेंगे पर्दे

अफगानिस्तान में तालिबान के आने के बाद से हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। लड़कियों के लिए स्पष्ट शिक्षा नीति नहीं होने के कारण विश्वविद्यालयों में क्लासेस बंद ही है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने तालिबान सरकार को भेजे गए अपने प्रस्ताव में शिफ्ट और पर्दे लगाकर कक्षाएं चलाने का सुझाव दिया है।

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एविसेना विश्वविद्यालय में नए रूल के हिसाब से पढ़ाई करते छात्र (रायटर / फाइल)

तालिबान के अफगानिस्तान में काबिज होने के बाद से लड़कियों पर पाबंदियों को लेकर रोज नए-नए फरमान जारी किए जा रहे हैं। कभी इन्हें खेलने से रोक दिया जाता है, तो कभी काम करने वाली महिलाओं को घर पर ही रहने का आदेश दिया जाता है। अब तालिबान लड़कियों की पढ़ाई को लेकर भी सख्त कानून बनाने जा रहा है।

तालिबान के राज में अफगानिस्तान की यूनिवर्सिटी में लड़के और लड़कियां एक दूसरे से ना मिल पाएं, इसके लिए कक्षाओं में पर्दे लगाए जाएंगे। नए प्रस्ताव के अनुसार पर्दे लगाने के साथ-साथ युवक-युवतियों के लिए अलग-अलग शिफ्ट में कक्षाएं चलेंगी।

तालिबान के आने के बाद से हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। तालिबान प्रशासन ने अभी तक शिक्षा को लेकर कोई स्पष्ट रोडमैप पेश नहीं किया है, जिसके कारण काबुल विश्वविद्यालय में 26,000, और कंधार विश्वविद्यालय में 10,000 छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। काबुल विश्वविद्यालय में लगभग 12000 युवतियां और कंधार विश्वविद्यालय में 1000 युवतियां पढ़ रही हैं।

कम छात्रों वाले कई प्राइवेट विश्वविद्यालयों ने कक्षाएं फिर से शुरू कर दी हैं। कंधार विश्वविद्यालय के चांसलर अब्दुल वहीद वासिक ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि सरकारी विश्वविद्यालय केवल पैसा होने के बाद ही फिर से खुल सकते हैं। हमें यह भी याद रखना होगा कि सरकारी विश्वविद्यालयों में निजी विश्वविद्यालयों की तुलना में अधिक छात्र होते हैं। निजी विश्वविद्यालयों में, प्रत्येक कक्षा में केवल 10 से 20 छात्र होते हैं और इसलिए ऐसी कक्षाओं में पुरुषों और महिलाओं को अलग-अलग करना बहुत आसान होता है। जबकि हमारे एक कक्षा में लगभग 100 से 150 छात्र होते हैं। इसलिए यह हमारे लिए इतना आसान नहीं है, खासकर ऐसे मामलों में जहां एक कक्षा में बहुत कम महिलाएं हैं।

अफगानिस्तान में लगभग 40 सार्वजनिक विश्वविद्यालय हैं। तालिबान के को-एजुकेशन पर प्रतिबंध के आदेश के बाद, उच्च शिक्षा मंत्रालय ने सरकारी विश्वविद्यालयों को फिर से खोलने की अपनी योजना प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। अभी के लिए, अधिकांश विश्वविद्यालयों ने प्रस्ताव दिया है कि लड़कियों को पर्दे या क्यूबिकल के पीछे से कक्षाओं में भाग लेने की अनुमति दी जाए, या उन प्रांतों के संस्थानों में उन्हें ट्रांसफर कर दिया जाए, जहां से वे आती हैं।

तखर विश्वविद्यालय के चांसलर खैरुद्दीन खैरखा ने कहा कि हमारी योजना लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग कक्षाएं आयोजित करने की है। ये वहां लागू होगा जहां एक कक्षा में 15 से अधिक लड़कियां हैं। ऐसा करने के लिए हम शिफ्ट में क्लास शुरू करने की योजना बना रहे हैं। यदि 15 से कम लड़कियां हैं, तो हम डिवाइडर लगाएंगे, जैसा कि अस्पतालों में उपयोग किया जाता है।

कंधार विश्वविद्यालय के चांसलर ने कहा कि इस मुद्दे पर संस्थान की अकादमिक परिषद में विचार किया गया है, जिसके बाद सरकार को एक योजना भेजी गई। इसमें लड़कियों को उनके प्रांतों के संस्थानों में स्थानांतरित करने की अनुमति देने का अनुरोध भी शामिल है।

उन्होंने कहा- “हमने यह प्रस्ताव इसलिए दिया है क्योंकि हमारी कुछ छात्राओं ने ट्रांसफर होने में रुचि व्यक्त की है, लेकिन जो लोग कंधार विश्वविद्यालय में कक्षाएं जारी रखना चाहते हैं, उनके लिए हम कक्षा के अंदर एक ऐसा कोना बनाएंगे जो एक पर्दे से अलग हो”।

तखर विश्वविद्यालय की तरह, 15 से अधिक महिलाओं वाली कक्षाओं के लिए, कंधार विश्वविद्यालय ने भी छात्रों को शिफ्ट में – लड़कियों के लिए सुबह और पुरुषों के लिए दोपहर में बुलाने का प्रस्ताव दिया है।

हालांकि इन प्रस्तावों के साथ भी एक दिक्कत है। पहले से ही आर्थिक तंगी का सामना कर रहे संस्थानों पर इस प्रस्ताव के पास होने के बाद से और भार पड़ेगा। इनमें से कुछ संस्थान तालिबान के आने के बाद से शिक्षकों को वेतन नहीं दे पा रहे हैं। अभी के लिए, कंधार विश्वविद्यालय ने सरकार से लगभग 6,200 डॉलर, तखर विश्वविद्यालय ने 19,000 डॉलर और हेलमंड ने 12,000 डॉलर की रकम इन व्यवस्थाओं के लिए मांगे हैं।

अफगानिस्तान के सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में ग्रेजुएश शिक्षा निःशुल्क है। छात्रों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। छात्रावासों में रहने वालों को मुफ्त भोजन और आवास भी प्रदान किया जाता है।

काबुल विश्वविद्यालय के सूत्र ने कहा कि तालिबान ने प्रस्ताव के जवाब में लैंगिक भेदभाव को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता दोहराई है। इसने विश्वविद्यालय से महिला छात्रों को उनके स्थानीय प्रांतों में स्थानांतरित करने पर विचार करने के लिए भी कहा है। लेकिन काबुल विश्वविद्यालय का अपना अलग कोर्स है। इसलिए छात्रों को अन्य संस्थानों में ले जाना संभव नहीं है। साथ ही तालिबान का कहना है कि महिलाओं के लिए महिला शिक्षक ही हों, जोकि ये भी पॉसिबल नहीं है क्योंकि महिला शिक्षकों की संख्या काफी कम है।

हालांकि कंधार और हेलमंद विश्वविद्यालय के कुलपतियों ने कहा कि पुरुष शिक्षकों द्वारा महिलाओं को पढ़ाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। हेलमंद विश्वविद्यालय के चांसलर अब्दुल रहमान ने कहा कि पुरुषों और महिलाओं के लिए दो अलग-अलग शिफ्टों में कक्षाएं आयोजित करना हमारे जैसे विश्वविद्यालय के लिए काम नहीं करता है। क्योंकि हमारे पास 235 महिलाएं और 2,000 से अधिक पुरुष हैं। हम केवल 23 कक्षाओं के साथ सभी पुरुष छात्रों को एक शिफ्ट में नहीं ला सकते। हमारे पास 107 शिक्षक हैं, सभी पुरुष। कक्षाएं ढूंढना पहली चुनौती है और पर्याप्त प्रोफेसर ढूंढना हमारे विश्वविद्यालय के लिए दूसरी समस्या है।

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