तालिबान ने भारत से मांगी मदद, फ्लाइट ऑपरेशन शुरू करने में सहयोग की अपील

अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने भारत सरकार को पत्र लिखकर फिर से विमान सेवा शुरू करने का अनुरोध किया है। तालिबान ने डीजीसीए को इसके लिए पत्र लिखा है। DGCA प्रमुख अरुण कुमार ने पत्र की पुष्टि करते हुए कहा कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस मामले पर फैसला करेगा।

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काबुल एयरपोर्ट के पास तैनात तालिबानी सुरक्षाकर्मी (फोटो- रॉयटर्स)

तालिबान की सरकार ने अफगानिस्तान में विमान सेवा शुरू करने के लिए भारत से सहयोग अपील की है। इसके लिए तालिबान ने डीजीसीए को पत्र लिखा है।

नए तालिबान शासन के अंडर में काम करने वाले अफगानिस्तान नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने भारत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) को पत्र लिखकर विमान सेवा शुरू करने की मांग की है। अफगानिस्तान ने अपनी एयरलाइंस काम एयर और एरियाना अफगान एयरलाइंस द्वारा दिल्ली के लिए उड़ानों को फिर से शुरू करने की अपील की है।

इंडियन एक्सप्रेस के द्वारा संपर्क किए जाने पर, DGCA प्रमुख अरुण कुमार ने पत्र की पुष्टि की, और कहा कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस मामले पर फैसला करेगा, क्योंकि यह एक नीतिगत मुद्दा है।

तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद अफगान हवाई क्षेत्र को ‘अनियंत्रित’ घोषित किया गया था। जिसके बाद नागरिक उड़ानों के लिए से प्रभावी रूप से बंद कर दिया गया था। जिसके बाद तालिबान ने कतर के सहयोग से काबुल सहित देश के कई हवाई अड्डों को फिर से शुरू करने में कामयाबी हासिल कर पाई थी।

एरियाना अफगान एयरलाइन पहले से ही घरेलू उड़ानों का संचालन कर रही है। तालिबान के कब्जे के बाद पहली अंतरराष्ट्रीय उड़ान 13 सितंबर को पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस द्वारा इस्लामाबाद और काबुल के बीच शुरू की गई थी। वर्तमान में, काबुल से पाकिस्तान और ईरान के लिए नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानें जारी हैं।

अफगानिस्तान के नागरिक उड्डयन और परिवहन मंत्री अल्हज हमीदुल्लाह अखुंदजादा ने अरुण कुमार के नाम से लिखे पत्र में कहा है- “इस पत्र का इरादा हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के आधार पर दो देशों के बीच सुगम यात्रा को बनाए रखना है। इसलिए, अफगानिस्तान नागरिक उड्डयन प्राधिकरण आपसे उड़ानों की सुविधा के लिए अनुरोध करता है।”

आगे उन्होंने लिखा- “जैसा कि आप जानते हैं हाल ही में अमेरिकी सैनिकों ने वापसी से पहले काबुल हवाई अड्डे को क्षतिग्रस्त और निष्क्रिय कर दिया गया था। जिसके बाद कतर की सहायता से, हवाई अड्डे को एक बार फिर से चालू किया जा चुका है। इस संबंध में 6 सितंबर को एक नोटम भी जारी किया गया था”।

तालिबान के मंत्री के इस खत का अधिकारिक जवाब अभी भारत ने नहीं दिया है। बता दें कि अमेरिकी सैनिकों के अफगानिस्तान से निकलने के बाद काबुल हवाई अड्डा भारत सहित कई देशों के लिए, लोगों को वहां से निकालने का मुख्य जरिया था। तालिबान के कब्जे से पहले भारत की ओर से एयर इंडिया और स्पाइसजेट दिल्ली और काबुल के बीच उड़ान भरते थे। स्पाइसजेट ने कोरोना के समय तो एयर इंडिया ने 15 अगस्त के बाद अपनी सेवा बंद कर दी थी।

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