तालिबान का वादा झूठा! कैबिनेट में कोई महिला नहीं, सरकार में ISI की बड़ी भूमिका, आतंकियों को मिली बड़ी जिम्मेदारी

अफगानिस्तान में बनी तालिबानी सरकार में कोई भी महिला नहीं है। इससे पहले तालिबान महिलाओं को उचित स्थान देने की डींगें हांक रहा था। वहीं कैबिनेट में अमिरिका द्वारा घोषित आतंकी संगठन के लोगों को भी जगह मिली है।

Bebak Bol, Talibani Governance
काबुल में पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बंदूक ताने खड़ा तालिबानी। फोटो- रॉयटर्स

काफी उठापठक की खबरों के बीच तालिबान ने अफगानिस्तान में सरकार का ऐलान कर दिया है। रहबरी शूरा के प्रमुख मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद को प्रधानमंत्री बनाया गया है। यह वही शख्स है जिसने साल 2001 में बामियान बुद्ध की प्रतिमा को नष्ट करने का आदेश दिया था। मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को उपप्रधानमंत्री बनाया गया है। इस सरकार में यह भी देखा जा रहा है कि हक्कानी नेटवर्क और कंधार के तालिाबान को बड़ी जिम्मेदारियां दी गई हैं, वहीं दोहा के तालिबान को किनारे कर दिया गया है। बता दें कि दोहा से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद स्थापित किए जाते थे। वहीं बात करें महिलाओं की तो तालिबानी सरकार में महिलाओं के लिए कोई जगह नहीं है। कब्जे के बाद तालिबान की तरफ से किए जाने वाले वादे, इस संबंध में झूठे निकले।

जानकारी के मुताबिक कैबिनेट में 33 में से कम से कम 20 मंत्री कंधार के तालिबानी ग्रुप और हक्कानी नेटवर्क से हैं। तालिबानी प्रवक्ता ने महिलाओं को सरकार में शामिल करने का झूठा वादा तो किया था लेकिन इस सरकार में किसी महिला को जगह नहीं दी गई है। सरकार में सिराजुद्दीन हक्कानी को अहम जिम्मेदारी मिलना इस बात की ओर संकेत है कि पाकिस्तान के आईएसआई ने कैबिनेट गठन में बड़ी भूमिका निभाई है। वह अमेरिका की मोस्ट वॉन्डेट लिस्ट में शामिल है और उसपर 50 लाख डॉलर इनाम भी है।

बता दें कि हक्कानी नेटवर्क का मुखिया और जलालुद्दीन हक्कानी का बेटा 2008 में काबुल में भारत के दूतावास पर हुए हमले का भी जिम्मेदार है। उसने 2009 और 2010 में भी भारत और भारत से जुड़ी अन्य जगहों को निशाने बनाने की कोशिश की। हक्कानी को इंटीरियर मिनिस्टर का पद दिया गया है। अब कानून व्यवस्था भी उसी के अधिकार क्षेत्र में होगी। वहीं प्रांतों के गवर्नर की नियुक्ति भी उसके द्वारा की जा सकती है।

एफबीआई की वेबसाइट पर मौजूद जानकारियों के मुताबिक सिराजुद्दीन हक्कानी पर पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई की हत्या की कोशिश का भी आरोप है। हालांकि इस बार तालिबान के कब्जे के बाद देखा गया है कि करजई उनकी वकालत कर रहे थे।

मुल्ला मोहम्मद हसन जिसे प्रधानमंत्री बनाया गया है, वह भी यूएन की टेरर लिस्ट में शामिल है। वह कंधार का ही रहने वाला है और तालिबान के संस्थापकों में से एक है। रहबरी शूरा में काम करने के दौरान वह मुल्ला अखुंदजादा के बेहद करीब था। 1996 से 2001 तक वह अफगानिस्तान में विदेश मंत्रालय और उप प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुका है।

इस बार उपप्रधानमंत्री बनाया गया मुल्ला बरादर, तालिबान के कोफाउंडर है। फरवरी 2010 में उसे आईएसआई ने गिरफ्तार किया था और बाद में 2018 में छोड़ दिया गया। इसके बाद वह दोहा में रहने लगा और अमेरिका के बातचीत करने में उसने बड़ी भूमिका निभाई। अमेरिकी राष्ट्रपति से फोन पर बात करने वाला वह पहला तालिबानी नेता है।

तालिबान के फाउंडर मुल्ला मोहम्मद उमर का बेटा मुल्ला याकूब तालिबानी सरकार में रक्षा मंत्री बना है। हक्कानी के विश्वासपात्र मुल्ला ताज मीर जवाद तो डेप्युटी इंटेलिजेंस चीफ बनाया गया है। अलकायदा और कई जेहादी ग्रुप ने मिलकर जब काबुल पर हमले की तैयारी की थी, तो यह उसकी अगुआई कर रहा था।

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