पाकिस्तानी सेना के पास तालिबान चीफ? अफगानिस्तान में यूं तबाही मचा रहे तालिबानी

भारत की खुफिया एजेंसी के एक अधिकारी ने संकेत दिए हैं कि तालिबान चीफ अखुंदजादा पाकिस्तानी आर्मी की कस्टडी में हो सकता है। वह लंबे समय से नजर नहीं आया है।

काबुल में पट्रोलिंग करते तालिबानी। फोटो- एपी

अफगानिस्तान में तालिबानी कब्जे के बाद अब यही चर्चा हो रही है कि आखिर सत्ता की चाभी किसके हाथ में रहेगी। इसमें टॉप पर हैबतुल्लाह अखुंदजादा का नाम आता है। हालांकि वह लंबे समय से सामने नहीं आया है। भारतीय खुफिया एजेंसी से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिए हैं कि अखुंदजादा पाकिस्तानी सेना की हिरासत में हो सकता है। आखिरी बार उसका बयान मई में आया था और इसके बाद तालिबानी लड़ाकों और बडे़ नेताओं ने भी उसे नहीं देखा है।

बता दें कि साल 2016 में अख्तूर मंसूर के अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे जाने के बाद अखुंदजादा को तालिबान का नया चीफ बनाया गया था। तालिबान ने वीडियो जारी करके यह बात बताई थी। एएफपी के मुताबिक अखुंदजादा कानून का जानने वाला है और वह नियमों को इस्लाम की व्याख्याओं के साथ मिलाकर पेश करने के लिए जाना जाता है। वहीं भारत को ऐसी भी खबरें मिली हैं कि अलकायदा की बढ़ती ताकत को देखते हुए लश्कर और जैश भी तालिबान के साथ ही हो लिए हैं।

वादाखिलाफीः अफगानिस्तान में तबाही मचा रहा तालिबान
तालिबान ने भले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा हो कि उसकी सरकार में लोगों पर जुल्म नहीं किया जाएगा लेकिन उसका असली चेहरा सामने आने लगा है। जहां एक तरफ अफगानी झंडे तले लोगों के विरोध प्रदर्शन को कुचलने के लिए बंदूकों का सहारा लिया गया तो दूसरी तरफ महिला कर्मचारियों से कह दिया गया कि अब ऑफिस आने की जरूरत नहीं है।

तालिबान मीडिया कर्मियों को भी निशाना बना रहा है। रॉयटर्स के मुताबिक तालिबानी लड़ाके जर्मन न्यूज चैनल डॉयचे वेले के एक पत्रकार की तलाश कर रहे थे। उसे ढूंढते हुए वे उसके घर तक पहुंच गए। जब वह नहीं मिला तो तालिबानियों ने उसके दो रिश्तेदारों को गोली मार दी। इसमें से एक की मौत हो गई।

एमनेस्टी इंटरनेशनल के शोधकर्ताओं ने गजनी प्रांत में प्रत्यक्षदर्शियों से बात की जिन्होंने बताया कि किस तरह तालिबान ने चार से छह जुलाई के बीच मुंदाराख्त के गांव में नौ लोगों की हत्या कर दी। इसने बताया कि छह लोगों की गोली मारकर हत्या की गई जबकि तीन लोगों को प्रताड़ित कर मार डाला गया।

एसोसिएटेड प्रेस का दावा है कि अमेरिका के साथ हुए समझौते के तहत 31 अगस्त से पहले तालिबान अफगानिस्तान में सरकार बनाने की घोषणा नहीं करेगा। अमेरिका ने कहा है कि पूरी कोशिश की जाएगी कि 31 अगस्त तक अमेरिकी लोगों को अफगानिस्तान से निकाल लिया जाए। हालांकि इस प्रक्रिया में ज्यादा समय भी लग सकता है।

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