छोटे से देश ताइवान ने दी चीन को खुली चेतावनी, कहा- हमला किया तो परिणाम विनाशकारी होंगे

चीन पिछले एक साल से ताइवान पर दबाव बनाने की कोशिश में लगा हुआ है। हालांकि ताइवान लगातार इसकी शिकायत भी करता आया है लेकिन चीन बाज नहीं आ रहा। ऐसे में अब ताइवान ने चीन को धमकी दी है।

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग वेन(फोटो सोर्स: PTI/AFP)

चीन के 150 चीनी लड़ाकू विमान शुक्रवार से अबतक कई बार ताइवान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन कर चुके हैं। ऐसे में इस हरकत पर ताइवान ने चीन को खुली धमकी दी है। ताइवान ने कहा है कि अपने आपको बचाने के लिए हमें जो भी कदम उठाना पड़ेगा, हम उसके लिए तैयार हैं। ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग वेन ने दो टूक में साफ किया है कि, हर हालत में ताइवान अपनी रक्षा करेगा।

गौरतलब है कि चीन से काफी छोटे देश ताइवान का आरोप है कि चीन पिछले कई दिनों से हवाई क्षेत्र का उल्लंघन कर रहा है। ऐसे में चेतावनी देते हुए उसने कहा है कि, लड़ाकू विमानों की घुसपैठ के बाद अगर चीन ने हम पर कब्जा किया तो ‘क्षेत्रीय शांति के लिए इसके विनाशकारी परिणाम’ होंगे।

ताइवान पर चीन द्वारा दबाव बनाने की कोशिश पर ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग वेन ने कहा, ‘याद रखना चाहिए कि अगर ताइवान पर कब्जा होता है तो स्थानीय शांति और लोकतांत्रिक गठबंधन सिस्टम के लिए इसके परिणाम विनाशकारी साबित होंगे। वहीं ताइवान के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि सोमवार को चीन के 56 लड़ाकू विमानों ने उसके हवाई रक्षा क्षेत्र में घुसपैठ की।

इस मामले में अमेरिका ने ताइवान की सहायता करने की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए चीन की इस हरकत को “उकसाने वाली सैन्य” गतिविधि कहा है। अमेरिका ने कहा, बीजिंग से हमारी अपील है कि वह ताइवान पर सैन्य, कूटनीतिक और आर्थिक दबाव और दंडात्मक कार्रवाई को रोके।’

बता दें कि चीन की तरफ से ताइवान पर पिछले एक साल से इस तरह की घटिया चालें चली जा रही हैं। ताइवान इसकी शिकायत भी करता आया है लेकिन चीन बाज नहीं आ रहा। ऐसे में अब ताइवान ने साफ कर दिया है कि खुद को बचाने के लिए वो हर कदम उठाएगा।

ताइवान को अपना हिस्सा मानता है चीन: दरअसल ताइवान को चीन अपना हिस्सा मानता है। लेकिन ताइवान खुद को एक स्वतंत्र देश के रूप में मानता है। उसका कहना है कि पूरी दुनिया को उसकी स्वतंत्रता और संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए। हालांकि चीन को इन सब बातों से फर्क नहीं पड़ता। वो अपनी धमकियों में साफ तौर पर कह चुका है कि लोकतांत्रिक तरीके से वो ताइवान पर राज करना चाहता है। अगर ताइवान ने इससे इनकार किया, तो फिर ताकत के दम पर चीन ताइवान पर कब्जा कर लेगा।

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