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सुषमा ने पाकिस्तान से कहा, कश्मीर को हासिल करने का ख्वाब देखना छोड़ दें

सुषमा ने कहा कि भारत ने इस्लामाबाद के साथ दोस्ती के आधार पर बातचीत शुरू की लेकिन बदले में पठानकोट और उरी पर आतंकी हमला मिला।

Author संयुक्त राष्ट्र | September 26, 2016 11:26 PM
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करतीं भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज। (REUTERS/Brendan McDermid/26 Sep, 2016)

भारत ने सोमवार (26 सितंबर) को पूरी दृढ़ता से पाकिस्तान से कहा कि ज्यादा से ज्यादा आतंकी घटनाओं से भारत की भूमि हथियाने के उसके इरादे कभी पूरे नहीं होंगे, वह कश्मीर को हथियाने का ख्वाब देखना छोड़ दें, कश्मीर भारत का अभिन्न अंगा था, है और रहेगा। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 71वें सत्र को संबोधित करते हुए सुषमा स्वराज ने कहा, ‘मैं पूरी दृढ़ता और विश्वास के साथ कहना चाहूंगी कि पाकिस्तान यह सपना देखना छोड़ दे, जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा।’ उन्होंने कहा कि हमने दोस्ती के आधार पर बातचीत की लेकिन इस मित्रता के बदले में हमें मिला क्या, पठानकोट, बहादुर अली और उरी। बहादुर अली तो जिंदा आतंकवादी हमारे कब्जे में है, जो पाकिस्तान से भारत में किए जा रहे सीमा पार आतंकवाद का जीता जागता सबूत है। लेकिन पाकिस्तान को जब इन घटनाओं के बारे में बताया जाता है, तो वह तुरंत इंकार करके पल्ला झाड़ लेता है। विदेश मंत्री ने कहा, ‘वह शायद सोचता है कि ज्यादा से ज्यादा आतंकी घटनाओं से भारत की भूमि हथियाने के उसके इरादे पूरे हो जाएंगे। लेकिन उसके मंसूबे कभी पूरे नहीं होंगे।’

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उन्होंने कहा कि उसने इस्लामाबाद के साथ किसी शर्त के आधार पर नहीं बल्कि दोस्ती के आधार पर बातचीत शुरू की लेकिन इसके बदले पठानकोट मिला, उरी पर आतंकी हमले के रूप में बदला मिला। विदेश मंत्री ने कहा, ‘दूसरी बात पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कही कि बातचीत के लिए जो शर्त भारत लगा रहा है, वो हमें मंजूर नहीं है। कौन सी शर्तें? क्या हमने कोई शर्त रखकर न्यौता दिया था शपथ ग्रहण समारोह में आने का? जब मैं इस्लामाबाद गई थी, हर्ट ऑफ एशिया कांफ्रेंस के लिए, तो क्या हमने कोई शर्त रखकर समग्र वार्ता शुरू की थी?’ उन्होंने कहा, ‘जब प्रधानमंत्री मोदी काबुल से चलकर लाहौर पहुंचे थे तो क्या किसी शर्त के साथ गए थे? किस शर्त की बात हो रही है?’ सुषमा ने कहा, ‘हमने शर्तो के आधार पर नहीं बल्कि मित्रता के आधार पर सभी आपसी विवादों को सुलझाने की पहल की और दो साल तक मित्रता का वो पैमाना खड़ा किया जो आज से पहले कभी नहीं हुआ। ईद की मुबारकबाद, क्रिकेट की शुभकामनाएं, स्वास्थ्य की कुशलक्षेम, क्या ये सब शर्तो के साथ होता था?’

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