ताज़ा खबर
 

आतंकवाद पर वैश्विक संधि के प्रस्ताव को मिले मंज़ूरी, संरा सुरक्षा परिषद में सुधार वक़्त की ज़रूरत: सुषमा स्वराज

सुषमा ने कहा, 'आतंकवाद पर समग्र संधि (सीसीआईटी) का 1996 से भारत ने प्रस्ताव दे रखा है। बीस साल गुजर गए मगर 2016 में भी हम सीसीआईटी को अंजाम तक नहीं पहुंचा सके।'
Author संयुक्त राष्ट्र | September 26, 2016 23:58 pm
न्यूयॉर्क में 71वें संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करतीं भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज। (AP Photo/Seth Wenig/26 Sep, 2016)

भारत ने सोमवार (26 सितंबर) को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद पर काफी समय से लंबित वैश्विक संधि का तत्काल अनुमोदन करने का आह्वान किया और साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को लागू करने पर जोर दिया। भारत ने कहा कि जिस प्रकार आतंकवाद से लड़ने के लिए हमें एक समकालीन नीति चाहिए, उसी प्रकार हमें एक ऐसी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भी चाहिए जो आज के वैश्विक परिदृश्य के अनुकूल हो। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 71वें सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा, ‘जो कार्य हमने किए हैं, उन्हें तो हम गिनें ही, मगर जो नहीं कर पाए, उनको भी गिनना जरूरी है।’ उन्होंने कहा कि आतंकवाद पर समग्र संधि (सीसीआईटी) का 1996 से भारत ने प्रस्ताव दे रखा है। बीस साल गुजर गए मगर आज 2016 में भी हम सीसीआईटी को अंजाम तक नहीं पहुंचा सके।

सुषमा ने कहा, ‘इसी कारण से हम कोई ऐसा अंतरराष्ट्रीय मानक नहीं बना सके, जिसके अंतर्गत आतंकवादियों को सजा दी जा सके या उनका प्रत्यर्पण हो सके। इसीलिए आप सबसे मेरा अनुरोध है कि यह सभा पूरे दृढ़ निश्चय के साथ जल्द सीसीआईटी को पारित करे।’
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार आतंकवाद से लड़ने के लिए हमें एक समकालीन नीति चाहिए, उसी प्रकार हमें एक ऐसी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भी चाहिए जो आज के वैश्विक परिदृश्य के अनुकूल हो। विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘अधिकांश देशों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र 1945 की वैश्विक परिस्थिति के अनुरूप सिर्फ कुछ ही देशों के हितों की रक्षा न करे। चाहे वह किसी संस्था की बात हो या मुद्दों की, हमें आज की वास्तविकता और चुनौतियों के अनुसार काम करना होगा। आज सुरक्षा परिषद की स्थायी और अस्थायी दोनों सीटों में विस्तार की आवश्यकता है जिससे सुरक्षा परिषद समकालीन बन सके।’

सुषमा ने कहा, ‘मेरा अनुरोध है कि महासभा की इच्छानुसार अंतर सरकारी वार्ता (आईजीएन) प्रक्रिया के तहत सामग्री आधारित वार्ता (टेक्स बेस्ड नेगोशिएशन) जल्दी प्रारंभ किए जाएं।’ विदेश मंत्री ने कहा कि 21वीं सदी पर शुरुआत से ही अशांति और हिंसा का साया रहा है। परंतु मिलजुल कर प्रयास करने से हम इसे मानव सभ्यता के इतिहास में एक स्वर्णिम युग में बदल सकते हैं। लेकिन भविष्य में क्या होगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम आज क्या करते हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.