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‘एक्ट ईस्ट’ नीति: भारत ने म्यांमार से कहा- हर मदद करने को हैं तैयार

भारत और म्यांमा के बीच निकट संबंध हैं और कृषि, आईटी, मानव संसाधन विकास, बुनियादी ढांचा विकास, संस्कृति इत्यादि क्षेत्रों में दोनों के बीच विकास सहयोग कार्यक्रम चल रहे हैं।

Author ने प्यी दौ | August 23, 2016 1:29 AM
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज। (फाइल फोटो)

म्यांमार ने यहां की यात्रा पर आई विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को भरोसा दिलाया कि वह भारत विरोधी गतिविधियों के लिए अपनी सरजमीं का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं देगा, वहीं भारत ने दशकों के सैन्य शासन के बाद मार्च में सत्ता में आई नई सरकार को ‘हर मदद’ का भरोसा दिलाया। म्यांमार के राष्ट्रपति यू हीन ने भारत को एक मित्र देश बताते हुए स्वराज से कहा कि वह एक ‘बहुत सार्थक साझेदारी’ की उम्मीद करते हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने बताया कि म्यांमार के नेतृत्व ने भरोसा दिलाया है कि वे भारत के खिलाफ किसी भी गतिविधि के लिए उग्रवादी संगठनों को किसी भी क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं करने देंगे, क्योंकि वे इसे एक मित्र देश मानते हैं, जो म्यांमार के लोगों के साथ खड़ा रहा है और एक बहुत सार्थक साझेदारी की भारत से उम्मीद करते हैं। साथ ही, म्यांमार शांति, प्रगति और विकास की अपनी यात्रा जारी रखे हुए है।

सूत्रों के मुताबिक कुछ उग्रवादी संगठनों के सीमा पार की गतिविधियों के मुद्दे को स्वराज ने म्यांमार में पांच दशकों में लोकतांत्रिक रूप से पहली बार चुने गए राष्ट्रपति के साथ अपनी प्रथम यात्रा के दौरान उठाया। भारतीय थल सेना की एनएससीएन-के उग्रवादियों के साथ नगालैंड में एक मुठभेड़ होने के कुछ दिनों बाद स्वराज की यात्रा हुई है। ये उग्रवादी म्यांमार से भारत में घुसने की कोशिश कर रहे थे। खबरों के मुताबिक सेना सीमा पार कर म्यांमार में घुसी जिससे भारत ने आधिकारिक रूप से इनकार किया है। म्यांमार की विकास कोशिशों में भारत कैसे मदद कर सकता है, इस बारे में भी स्वराज ने म्यांमार के नेतृत्व के साथ चर्चा की। स्वरूप ने बताया कि उन्होंने संभावित सहयोग के कई क्षेत्रों पर चर्चा की, जैसे कि बिजली। भारत मोरे-तामू लिंक के जरिए म्यांमार को तीन मेगावाट बिजली पहले से आपूर्ति कर रहा लेकिन इसमें और वृद्धि हो सकती है।

स्वराज ने यहां नेतृत्व के साथ बैठक में नवीकरणीय ऊर्जा, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक विकास में सहयोग पर भी चर्चा की। स्वरूप ने सू च्यी के साथ स्वराज की 45 मिनट चली बैठक के बाद बताया कि उन्होंने कृषि, खास तौर पर दालों, के क्षेत्र में भी मजबूत सहयोग की संभावना के बारे में चर्चा की। म्यांमार से भारी मात्रा में दालें आयात करने की संभावना है। प्रथम वास्तविक चुनाव में मिली जीत को लेकर सू च्यी को बधाई देते हुए स्वराज ने उन्हें ‘हर मदद’ का भरोसा दिलाया। स्वराज ने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का संदेश है। स्वराज ने सू च्यी के साथ अपनी बैठक में कहा, ‘भारत आपके लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत करने और आपके लोगों के सामाजिक आर्थिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है।’ सू च्यी की नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी ने पिछले साल हुए चुनाव में शानदार जीत हासिल की थी जिसने पांच दशक पुराने सैन्य शासन को समाप्त कर दिया।

सूत्रों ने बताया कि दोनों देश लंबी साझा सीमा पर शांति एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश करने को सहमत हुए। म्यांमार ने कहा कि म्यांमार की सरजमीं से उग्रवादी संगठनों की गतिविधियों की इजाजत नहीं दी जाएगी और सुझाव दिया कि इस मुद्दे का हल होना चाहिए और स्थापित द्विपक्षीय मंचों के जरिए सहयोग को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। सूत्रों ने बताया कि स्वराज ने म्यांमार के राष्ट्रपति और सू च्यी, दोनों को उनकी सुविधा के मुताबिक यथाशीघ्र भारत की यात्रा करने का न्योता दिया। दोनों न्योता स्वीकार कर लिया गया। सू च्यी ने भारत के साथ अपने लंबे संबंध को याद किया। सू च्यी और राष्ट्रपति ने कहा कि वे भारत की यात्रा की उम्मीद कर रहे हैं।

लोकतांत्रिक संस्थाओं को और मजबूत करने की संभावनाएं तलाशने में भारत के मजबूत सहयोग से भी स्वराज ने म्यांमार को अवगत कराया। स्वरूप ने बताया कि म्यांमार के राष्ट्रपति ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जिससे म्यांमार सीख सकता है। राष्ट्रपति के हवाले से बताया गया, ‘भारत एक ऐसा देश है जिससे हमें लोकतंत्र के अर्थ के बारे में सर्वश्रेष्ठ सबक सीखना चाहिए।’ स्वरूप ने बताया कि सुषमा की यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों के विकास और विविधीकरण की एक मजबूत आधारशिला रखेगी। सूत्रों ने बताया कि चर्चाएं बहुत सौहार्दपूर्ण और दोस्ताना माहौल में हुई। स्वराज ने विकास लक्ष्यों को हासिल करने की कोशिशों में म्यांमार की नयी सरकार को पूरा समर्थन दिया। सू च्यी ने राष्ट्रीय सुलह पर 21 वीं सदी के पांगलोंग सम्मेलन के लिए तैयारियों की भी स्वराज को जानकारी दी। स्वराज ने अपनी ओर से भारत को इस प्रक्रिया में पूरा समर्थन देने की बात कही और कहा कि भारत कोई भी आवश्यक मदद करने को तैयार है।

सूत्रों ने बताया कि दोनों देश इस बात से सहमत हुए कि भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ म्यांमार की जरूरतों के बारे में उपयुक्त बैठती है और निकट भविष्य में परस्पर फायदेमंद सहयोग के ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जानी चाहिए। स्वराज के साथ विदेश सचिव एस जयशंकर और विदेश मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी थे। नोबेल पुरस्कार से सम्मानित सू च्यी ने सहयोग को लेकर स्वराज का शुक्रिया अदा किया। सैन्य शासन कालीन संविधान के द्वारा राष्ट्रपति बनने पर प्रतिबंध का सामना करने के बावजूद सू च्यी का देश की प्रथम असैन्य सरकार पर मजबूत नियंत्रण है। दिलचस्प है कि चीन की सू च्यी द्वारा एक हाई प्रोफाइल यात्रा किए जाने के कुछ दिनों बाद ही स्वराज की यात्रा हुई है।

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