ताज़ा खबर
 

अमेरिकी थिंक टैंक ने कहा- भारत को सर्जिकल स्‍ट्राइक करना ही था, मोदी उरी हमले से उपजे गुस्‍से पर चुप नहीं रह सकते थेे

अमेरिकी थिंक-टैंक ने कहा, ‘मोदी उरी (हमले) को लेकर पैदा हुए गुस्से को अनुत्तरित नहीं रहने दे सकते।’

Author वॉशिंगटन | September 30, 2016 3:49 PM
जम्मू से करीब 35 किलोमीटर दूर रणबीर सिंह पुरा के पास भारत-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र में पेट्रोलिंग करता सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का एक जवान। (Photo-AP/File)

अमेरिका के एक शीर्ष थिंक-टैंक ने शुक्रवार (30 सितंबर) को कहा कि भारत ने आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए भारत में घुसने की कोशिश कर रहे आतंकवादियों पर पाक के कब्जे वाले कश्मीर में जो लक्षित हमला किया है, उसे सावधानीपूर्वक आकलन करने के बाद किया गया था। उन्होंने कहा कि तनाव बढ़ने के लिए पूरी तरह पाकिस्तान जिम्मेदार है। अमेरिका के शीर्ष थिंक-टैंक कार्नेगी एनडाउमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के एश्ले टेलिस ने कहा, ‘भारत की यह प्रतिक्रिया आनी ही थी। यह पाकिस्तान के लिए एक संकेत है और भारत के लोगों के लिए एक आश्वासन है। मोदी उरी (हमले) को लेकर पैदा हुए गुस्से को अनुत्तरित नहीं रहने दे सकते।’

टेलिस ने कहा, ‘भारत का कदम सावधानीपूर्वक आकलन के साथ उठाया गया। आतंकी लॉन्च पैड पर हमला करने का उद्देश्य यह संदेश देना था कि भारत ने जवाबी कार्रवाई की अपनी आजादी खोई नहीं है लेकिन तनाव को और अधिक बढ़ाने की जिम्मेदारी अब पाकिस्तान पर है।’ एक सवाल के जवाब में टेलिस ने कहा कि अमेरिका संयम की वकालत करेगा लेकिन जब तक प्रशासन पाकिस्तान के खिलाफ सख्ती का इरादा नहीं रखता है, जो कि असंभाव्य है, तब तक भारत अपने खुद के हितों के अनुरूप चलेगा न कि अमेरिकियों के सहनशीलता के अनुरोधों के अनुरूप।

भारत-पाक के बीच जारी है बस सेवा, देखें वीडियो:

टेलिस ने कहा, ‘मुझे लगता है कि पाकिस्तान अभी उलझा हुआ है और वह भारतीय कार्रवाई का जवाब सैन्य कार्रवाई से नहीं दे सकता। लेकिन भारत के खिलाफ अभी तक जिस तरह का युद्ध वह करता आ रहा है, वह वृहद स्तर पर जारी रहेगा।’ सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के रिक रोसो ने कहा कि पिछले साल जब भारतीय सेना ने म्यांमा में आतंकियों के खिलाफ हमला किया था, तो यह ऐसे हमलों का एक संकेत था। उन्होंने कहा, ‘भारत ने पाकिस्तान के साथ अपनी तनातनी में अन्य नए तरीके भी दिखाए हैं, जैसे आगामी दक्षेस सम्मेलन में शिरकत नहीं करना, दक्षिण एशिया के अन्य देशों के साथ मजबूत संबंध बनाना और अमेरिका के साथ करीबी सुरक्षा संबंधों का इस्तेमाल पाकिस्तान के साथ सैन्य सहयोग घटाने के लिए उसपर दबाव बनाने के लिए करना।’

रोसो ने कहा कि इससे इस्लामाबाद को एकदम सतर्क रहना पड़ सकता है। हालांकि जब ऐसे संघर्ष में नए तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है तो स्पष्ट संदेश अहम हो जाता है क्योंकि दोनों पक्षों को एक दूसरे के इरादे पता होने चाहिए। यह आकस्मिक तनाव बढ़ने से रोकेगा। रोसो के अनुसार, भारत ने कई हालिया उकसावों को पाकिस्तान के आंतकी समूहों से जुड़ा हुआ बताया था। इसके बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इन उकसावों का जवाब देने के लिए कुछ अलग तरीके अपनाए हैं। उन्होंने कहा, ‘ये तरीके पूरी तरह नए नहीं हो सकते लेकिन चूंकि ये पाकिस्तान के उकसावों पर भारत की प्रतिक्रिया के केंद्र में रहे हैं, ऐसे में ये एक अलग रूख को रेखांकित करते हैं।’

रोसो ने कहा कि हालांकि भारतीय सेना ने कहा है कि वह और अधिक हमलों की योजना नहीं बना रही, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि कि भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा तनाव और अधिक बढ़ेगा या नहीं? रोसो ने कहा, ‘इस बात की संभावना वाकई बेहद कम है कि पाकिस्तानी सेना के नियंत्रण में रहने वाले पाकिस्तानी आतंकी अब और हमले नहीं करेंगे। लेकिन आतंकवाद का समर्थन करने वाले इस्लामाबाद को इसके लिए जो कीमतें चुकानी हैं, वे अब बढ़ रही हैं और ये पहले से अलग रूप ले रही हैं।’ आरएएनडी कॉरपोरेशन नामक थिंक टैंक के जोना ब्लैंक ने कहा कि 2008 के मुंबई हमलों के बाद भारत का धैर्य अब जवाब दे चुका है। उन्होंने कहा, ‘पठानकोट मामले पर सब्र टूट चुका था। यह उम्मीद करना शायद अवास्तविक ही था कि उरी हमले पर भी सैन्य जवाब नहीं दिया जाएगा।’

उन्होंने कहा, ‘अजित डोभाल और सुसेन राइस के बीच फोन पर बातचीत से दो अहम चीजें हुईं- पहली तो यह कि इसने पाकिस्तान के जवाबी हमले को रोकने में मदद के लिए अमेरिका को विश्वास में लिया है। दूसरी यह कि इसने अमेरिका को हमले के बारे में इस्लामाबाद या मीडिया से पता चलने की स्थिति को रोका, जिससे भारत और अमेरिका के संबंधों को खतरे में डालने से बचाया जा सका।’ ब्लैंक ने कहा, ‘इस बात की ज्यादा संभावना नहीं थी कि अमेरिका हमले की निंदा करेगा। एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन के खिलाफ अमेरिका के लक्षित हमले के बाद, अब भारत द्वारा सीमा पार की गई कार्रवाई की आलोचना को पाखंडपूर्ण माना जाता।’ उन्होंने कहा, ‘इसका नतीजा, भारत का सीमित हमला, पाकिस्तान की सीमित प्रतिक्रिया शायद उम्मीद के मुताबिक अच्छी रही। भारत की ओर से बड़ा हमला या पाकिस्तान के पूर्ण युद्ध की स्थिति में आ जाने से किसी भी देश का हित नहीं होता।’

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App