आखिरी वक्त में दयालु हो गया था इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन, 21 दिनों में हो गया था 24 साल की तानाशाही का अंत

इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैने क्रुर तो था लेकिन अंतिम दिनों में बहुत दयालु हो गया था। हाल ये था कि उसकी फांसी के बाद कुछ अमेरिकन सैनिक भी रोए थे।

Saddam Hussein
इराक के पूर्व तानाशाह सद्दाम हुसैन (source- agencies)

इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन, किसी के लिए क्रुर तो किसी के लिए दयालु… कुछ ऐसी ही कहानी है इराक के उस शासक की, जिसे हटाने के लिए अमेरिका को युद्ध करना पड़ गया था, और 21 दिनों के युद्ध में 24 साल की तानाशाही का खात्मा हो गया था।

सद्दाम अपने अंतिम दिनों में ज्यादा ही दयालु हो गया था। इसका पता इससे चलता है कि जब सद्दाम को फांसी दी गई थी, तो उनकी सुरक्षा में तैनात अमेरिकी सैनिक भी रो पड़े थे। 5 नवबंर 2006 को सद्दाम हुसैन को फांसी की सजा सुनाई गई थी। फांसी की सजा सुनाई जाने के बाद सद्दाम ने फांसी के बजाय गोली मारने के लिए कहा था। सद्दाम का कहना था कि वो मिलिट्री कमांडर की हैसियत रखता है। इसलिए उसे फांसी नहीं गोली मारी जाए। हालांकि कोर्ट ने उसकी इस गुजारिश को नहीं माना और उसे फांसी दे दी गई। सद्दाम पर 148 शियाओं की हत्या का आरोप लगा था।

सद्दाम क्रुर कैसे

सद्दाम की क्रुरता की तो कई कहानियां हैं। शियाओं के साथ क्रूरता और विरोधियों के साथ क्रूरता की कहानी तो उसकी प्रसिद्ध है ही, लेकिन इस मामले में उसने अपनी प्रेमिका को भी नहीं छोड़ा था। शकरा, यही नाम था सद्दाम हुसैन की प्रेमिका का। सद्दाम की मौत के बाद शकरा ने एक किताब लिखी, जिसमें उसने सद्दाम के साथ अपने संबंधों पर खुलकर लिखा.

अपनी किताब में शकरा ने लिखा कि पहली बार वो 1968 में मिले थे। सद्दाम के भाई के घर पर दोनों के बीच संबंध बने फिर वो वहां से वापस आ गई। कुछ दिनों बाद ही वो सद्दाम को भूल गई लेकिन सद्दाम उसे नहीं भूले। बाद में शकरा ने इराकी बिजनसमैन से शादी कर ली। जिसके बाद सद्दाम ने उसके पति को जेल में डलवा दिया। इसके बाद उसे इस्लाम कबूलवा कर पति से तलाक दिलवा दिया गया। जिसके बाद शकरा सद्दाम की पनाहगाह में रहने लगी। इसके बदले उसे खूब पैसा भी दिया गया। सद्दाम के साथ शकरा के संंबंध तब बिगड़ने लगे जब सद्दाम उसपर हाथ उठाने लगा। ऐसे ही एक दिन सद्दाम के बेटे उदय ने शकरा की बेटी की इज्जत पर हाथ डाल दिया। यहीं से शकरा, सद्दाम से नफरत करने लगी और विरोधियों के साथ हाथ मिलकार इराक से भाग निकली।

दामाद को भी सद्दाम ने मरवा दिया था

सद्दाम ने अपनी दोनों बेटियों की शादी उनकी मर्जी के अनुसार अपनी ही सुरक्षा में तैनात अंगरक्षकों (हुसैन कैमेल अल माजिद और सद्दाम कैमेल अल माजिद) से करा दी थी। सद्दाम के दामाद बनने के बाद इन अंगरक्षकों का रुतबा और बढ गया। शासन-प्रशासन और युद्ध इन सबमें उनकी बड़ी भूमिका रहने लगी। इराक के हथियार प्रोग्राम में भी इन्हीं का दिमाग बताया जाता रहा है, लेकिन बाद में सद्दाम हुसैन और दामादों के बीच विवाद हो गया। दोनों दामादों ने पत्नियों के साथ देश छोड़ा और जॉर्डन में शरण ले लिया। वहां से प्रेस कांफ्रेंस कर सद्दाम पर जमकर हमला बोला, लेकिन चीजें धीरे-धीरे बिगड़ने लगी। दोनों को पत्नियों ने छोड़ दिया और वापस इराक आ गईं। इधर दोनों ने तलाक का फैसला लिया, उधर सद्दाम के बेटे ने दोनों के पति की हत्या करवा दी।

अंतिम दिनों की कहानी

तो ये तो थी सद्दाम की कुछ क्रुरता की कहानियां, लेकिन सद्दाम हमेशा ऐसे नहीं रहा। अंतिम दिनों में सद्दाम इतना दलायु हो गया था कि उसकी सुरक्षा में तैनात अमेरिकी सैनिक भी उसकी फांसी पर रोए थे। अंतिम दिनों में साथ रहे अमेरिकी सैनिकों में से एक सैनिक बार्डेनवर्पर ने सद्दाम के ऊपर एक किताब लिखी। नाम रखा ‘द प्रिज़नर इन हिज़ पैलेस, हिज़ अमैरिकन गार्ड्स, एंड व्हाट हिस्ट्री लेफ़्ट अनसेड’।

जब रोने लगे अमेरिकी सैनिक

किताब के अनुसार सद्दाम की मौत पर सभी सैनिकों की आंखों में आंसू थे। यानि जिस तानाशाह को खत्म करने के लिए उन्हें भेजा गया था, वह उसकी मौत पर रो रहे थे। बार्डेनवर्पर किताब में लिखते हैं कि वो और उनके साथी सद्दाम को कभी भी एक हत्यारे के रूप में नहीं बल्कि दादा की तरह देखते थे। अंतिम दिनों में सद्दाम बहुत विनम्र हो गया था। उसे देखकर कोई कह ही नहीं सकता था कि वो कभी इतना क्रुर रहा होगा। एक सैनिक के भाई की जब मौत की खबर सद्दाम ने सुनी, तो वो उसे गले लगाते हुए बोला- आज से तुम मुझे अपना ही भाई समझो।

एक दूसरे सैनिक से कहा था कि अगर उसे अपनी संपत्ति की इस्तेमाल करने की अनुमति मिलती है तो वो उसके बेटे के पढ़ाने का खर्चा उठाने को तैयार है। एक सैनिक को तो सद्दाम ने अपना सूट तक गिफ्ट कर दिया था। यही नहीं फांसी वाले दिन तो एक सैनिक को उसने जबरदस्ती अपनी घड़ी उतार कर दे दी थी। इन सैनिकों को विश्वास था कि अगर उनपर कभी कोई मुसीबत आई तो उन्हें बचाने में सद्दाम अपनी जान की बाजी लगा देगा्।

बता दें कि जैविक हथियारो का आरोप लगातर अमेरिका ने इराक पर 20 मार्च 2003 को इराक पर आक्रमण कर दिया। 21 दिनों के युद्ध के बाद अमेरिका ने इराक पर कब्जा कर लिया, लेकिन सद्दाम उसके हाथ नहीं लगा। 30 दिसंबर 2003 को सद्दाम अमेरिका के हाथ लगा और उसे 2006 में फांसी दे दी थी।

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