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चट्टानों से निकले हीरे, धरती बनने का राज उजागर

दक्षिण अफ्रीका की प्राचीन चट्टानों की खुदाई से निकले हीरों ने साढ़े तीन अरब साल पहले हुए पृथ्वी के निर्माण से जुड़ी रहस्यों को उजागर किया है। एक नये अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है।

Author जोहानिसबर्ग | January 24, 2016 11:40 PM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फाइल फोटो)

दक्षिण अफ्रीका की प्राचीन चट्टानों की खुदाई से निकले हीरों ने साढ़े तीन अरब साल पहले हुए पृथ्वी के निर्माण से जुड़ी रहस्यों को उजागर किया है। एक नये अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है। विटवाटर्सरैंड सुपरग्रुप, जोहानिसबर्ग की सोने की खानों का प्रमुख चट्टान विन्यास से निकाले गए हीरों का अध्ययन दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग विश्वविद्यालय, विट्स विश्वविद्यालय और कनाडा के अल्बेर्टा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने किया है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि पृथ्वी पर आधुनिक टेक्टोनिक प्लेटें कब से सक्रिय हुर्इं।

पृथ्वी करीब साढ़े चार अरब साल पुरानी है। जब एक चट्टान का चार अरब साल पहले का रिकार्ड मौजूद है तो ऐसे में पृथ्वी की सतह पर बेहद प्राचीन चट्टानों के जटिल संरक्षक इतिहास पर बहस छिड़ गई है कि टेक्टोनिक्स प्लेटें यहां कब सक्रिय हुर्इं? कई शोधकर्ताओं का मानना है कि इन प्लेटों की शुरुआत चार से ढाई अरब साल पहले हुई जबकि सही समय पर अब भी मतभेद हैं। इस अध्ययन के हीरे तीन अरब साल पुरानी अवसादी चट्टानों के नीचे मिले हैं। इन हीरों की उत्पत्ति धरती के गर्भ में और भी अधिक गहराई पर हुई थी। हीरों के नाइट्रोजन संबंधी गुणों के आधार पर कहा जा सकता है कि इनकी उत्पत्ति भी लगभग साढ़े तीन अरब साल पहले हो गई थी। विट्स विश्वविद्यालय की केटी स्मार्ट ने कहा, ‘हम इन हीरों के कार्बन और नाइट्रोजन समरूपों के संघटन का इस्तेमाल यह जानने के लिए कर सकते हैं कि विटवाटर्सरैंड के हीरों को बनाने में लगा पदार्थ तीन अरब साल पहले कहां से आया था?’ ये परिणाम नेचर जियोसाइंस नामक जर्नल में प्रकाशित हुए।

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