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श्रीलंका की मुख्य विपक्षी पार्टी के नेता चाहते हैं तमिल कैदियों की रिहाई

तमिल राष्ट्रीय एलायंस (टीएनए) के नेता आर संपथन ने मैत्रीपाल सिरिसेन की सत्ताधारी पार्टी पर आरोप लगाया है कि वो सत्ता में आने के बाद इस दिशा में काम नहीं कर रही है।

Author कोलंबो | August 25, 2016 3:24 PM
तमिल राष्ट्रीय एलायंस (टीएनए) के नेता आर संपथन। (Reuters/File Photo)

श्रीलंका की मुख्य विपक्षी पार्टी के नेता और देश की मुख्य तमिल पार्टी के नेता ने सरकार से मांग की है कि वो जल्द से जल्द सभी राजनैतिक तमिल कैदियों को रिहा करें और आतंक विरोधी कानून को भी निरस्त करें। तमिल राष्ट्रीय एलायंस (टीएनए) के नेता आर संपथन ने मैत्रीपाल सिरिसेन की सत्ताधारी पार्टी पर आरोप लगाया है कि वो सत्ता में आने के बाद इस दिशा में काम नहीं कर रही है। संपथन ने संसद में कहा, ‘यहां तक कि महिंद्रा राजपक्षे की सरकार ने करीब 11,000 कैदियों को जेल से रिहा किया था। इन कैदियों की पुर्नवास की व्यवस्था भी कराई थी। लेकिन इस सरकार को सत्ता में आए हुए 18 महीने हो चुके हैं और वो इस दिशा में कोई काम नहीं कर रही है।

ऐसा पहली बार हुआ है जब संपथन ने संसद में इस तरह के आरोप मौजूदा सरकार पर लगाएं हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में आतंकवाद निरोधक अधिनियम पर रोक लगाने की बात कही थी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया है। उन्होंने आगे कहा कि दिसंबर 2015 में सरकार ने बिना आरोप के हिरासत में लिए गए 39 लोगों को जमानत पर छोड़ा था लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि बिना किसी आरोप के कुल 250 लोग हिरासत में लिए गए थे।

उनका कहना है कि एक ऐसे कानून के तहत लोगों की गिरफ्तारी कैसे हो सकती है, जिसकी आलोचना हर कोई करता है। उन्होंने आगे बताया कि केपी उर्फ कुमारन पथमनथन, जिसका संबध लिट्टे से है पर अभी तक आरोप तय नहीं किए गए हैं क्योंकि वह राजपक्षे सरकार का चहेता है।

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