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नौ भाई बहनों में एक राष्ट्रपति तो दूजा प्रधानमंत्री, श्रीलंका चुनाव में राजपक्षे बंधुओं का दबदबा बरकरार, हासिल किया दो तिहाई बहुमत

राजपक्षे बंधुओं को श्रीलंका में तमिल टाइगर्स की बगावत को कुचलने के लिए जाना जाता है। साल 2009 में महिंदा राजपक्षे श्रीलंका के राष्ट्रपति थे और उस वक्त छोटे भाई और मौजूदा राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे रक्षा सचिव थे।

Sri Lanka mahinda rajapaksha gotabaya rajapakshaमहिंदा राजपक्षे पीएम और गोटाबाया राजपक्षे श्रीलंका के राष्ट्रपति हैं। (AP/PTI)

भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका की सत्ता पर राजपक्षे बंधुओं का कब्जा हो गया है। बता दें कि श्रीलंका में हुए आम चुनाव में श्रीलंका पोदुजाना पेरामुना पार्टी (SLPP) ने दो तिहाई मतों से शानदार जीत हासिल की है। इसके साथ ही महिंदा राजपक्षे की एक बार फिर सत्ता में वापसी हो गई है। बता दें कि छोटे भाई गोटबाया राजपक्षे के राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बाद बड़े भाई महिंदा राजपक्षे कार्यवाहक पीएम की जिम्मेदारी निभा रहे थे। अब आम चुनाव में जीत के बाद महिंदा राजपक्षे का पीएम बनना तय हो गया है।

एसएलपीपी और उसकी सहयोगी पार्टियों ने 225 संसदीय सीटों में से 150 सीटों पर जीत दर्ज की है। बता दें कि राजपक्षे बंधुओं को श्रीलंका में तमिल टाइगर्स की बगावत को कुचलने के लिए जाना जाता है। साल 2009 में महिंदा राजपक्षे श्रीलंका के राष्ट्रपति थे और उस वक्त छोटे भाई और मौजूदा राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे रक्षा सचिव थे। तमिल टाइगर्स की बगावत को कुचलने के साथ ही श्रीलंका में 25 साल से चला आ रहे गृह युद्ध की भी समाप्ति हो गई थी।

यही वजह है कि राजपक्षे बंधुओं को श्रीलंका के बहुसंख्यक सिंहली समुदाय में काफी लोकप्रियता हासिल है। फिलहाल श्रीलंका संकट के दौर से गुजर रहा है। कोरोना से उसकी पर्यटन इंडस्ट्री को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है और उससे पहले इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा किए गए आतंकी हमलों से भी श्रीलंका अभी तक पूरी तरह से नहीं उभर पाया है। यही वजह है कि श्रीलंका को इस मुश्किल दौर से उबारने की जिम्मेदारी अब दोनों भाईयों के कंधों पर आ गई है।

प्रतिष्ठित राजनैतिक परिवार से है ताल्लुकः बता दें कि महिदां राजपक्षे और गोटबाया राजपक्षे 9 भाई-बहन हैं। इनके पिता के समय से ही इनका परिवार श्रीलंका का प्रमुख राजनैतिक परिवार रहा है। महिंदा राजपक्षे के पिता डीए राजपक्षे 1960 के दशक में विजयानंद दहानायके की सरकार में प्रमुख नेता थे।

बता दें कि महिंदा राजपक्षे को चीन का करीबी माना जाता है। महिंदा राजपक्षे के राष्ट्रपति रहते हुए ही श्रीलंका में चीन का निवेश काफी ज्यादा बढ़ा था। यही वजह है कि अब एक बार फिर महिंदा राजपक्षे के सत्ता पर काबिज होने के बाद चीन का श्रीलंका में दखल फिर से बढ़ जाए। वहीं पीएम मोदी ने महिंदा राजपक्षे को जीत की बधाई दी है और दोनों देशों के मिलकर काम करने की बात कही है।

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