Sri Lanka Economic Crisis: आर्थिक रूप से चुनौतियों का सामना कर रहे पड़ोसी मुल्क श्रीलंका में ईंधन की खपत एक बड़ा मुद्दा बन गया है। इसको लेकर देश के ऊर्जा मंत्री अनुरा करुणातिलके ने कहा है कि देश गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है, जिसमें ईंधन के चलते अर्थव्यवस्था पर दबाव ज्यादा पड़ रहा है। इसलिए ईंधन की खपत में कटौती करना आवश्यक है।
दरअसल, ऊर्जा मंत्री अनुरा करुणातिलके ने यह चेतावनी ऐसे समय में दी है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि पश्चिम एशिया संकट के चलते ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
ऊर्जा मंत्री ने की खपत कम करने की अपील
श्रीलंकाई ऊर्जा मंत्री ने कहा, “हम संकट की स्थिति में हैं, इसलिए हमें जितना संभव हो सके ईंधन की खपत कम करनी होगी। क्यूआर कोड प्रणाली लागू करने से खपत में कुछ कमी आई है, लेकिन यह हमारी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है।”
निर्धारित किया था कोटा
बता दें कि उपभोक्ताओं द्वारा ईंधन का अत्यधिक भंडारण (होर्डिंग) रोकने के लिए श्रीलंका ने मार्च के मध्य में क्यूआर-कोड आधारित ईंधन राशनिंग प्रणाली लागू की थी। इस व्यवस्था के तहत विभिन्न प्रकार के वाहनों के लिए साप्ताहिक ईंधन कोटा निर्धारित किया गया है।
कारों के लिए यह लिमिट साप्ताहिक तौर पर 15 लीटर और बसों के लिए 60 लीटर की थी। मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में बढ़ोतरी ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है।
तेल खरीद में खर्च हो रही मोटी रकम
श्रीलंकाई ऊर्जा मंत्री ने बताया कि जनवरी में तेल आयात पर 18.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर खर्च हुए थे। फरवरी में यह राशि 9.7 करोड़ अमेरिकी डॉलर रही, जबकि मई तक तेल आयात पर होने वाला खर्च बढ़कर 52.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर पहुंच गया है।
करुणातिलके ने कहा कि ईंधन की खपत में कमी लाने से देश से बाहर जाने वाली विदेशी मुद्रा, विशेषकर डॉलर, की निकासी कम होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मौजूदा स्थिति जारी रही, तो इसका व्यापक आर्थिक गतिविधियों और देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
बचत के उपाय लागू
पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से श्रीलंका ने ईंधन की खुदरा कीमतों में पांच बार संशोधन किया है। इसके अलावा सरकार ने खर्चों में कटौती और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए कई अन्य बचत उपाय भी लागू किए हैं।
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