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दक्षिण चीन सागर: चीन ने समुद्र में खोदा 3000 मीटर गहरा गड्ढा, प्लैटफॉर्म बनाने में अमेरिकी वैज्ञानिक भी कर रहे मदद

चीन दक्षिण चीन सागर के इलाकों में अंडरवॉटर ऑब्जरवेशन प्लैटफॉर्म बनाने की तैयारी में है।

दक्षिण चीन सागर में तैनात युद्धपोत। (PC: AP)

दक्षिण चीन सागर पर चीन लंबे समय से अपना दावा करता आ रहा है। इलाके पर दावेदारी को लेकर चीन का मलेशिया, फिलिपीन्स, वियतनाम समेत कुछ और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों से विवाद काफी समय से चल रहा हैं लेकिन चीन आज भी साउथ चाइना सी पर अपनी दावेदारी करता है। वहीं चीन अब इस इलाके में एक अंडरवॉटर ऑब्जरवेशन प्लैटफॉर्म बनाने की तैयारी में है। चीन पहली बार कोई अंडरवॉटर ऑब्जरवेशन प्लैटफॉर्म बनाएगा जो काफी लंबे समय तक टिक सके। इस ऑब्जरवेशन प्लैटफॉर्म को बनाने में शंघाई टोंगजी यूनिवर्सिटी और इंस्टिट्यूट ऑफ अकूस्टिक मिलकर बनाएंगे। खबरों के मुताबिक इसे बनाने के लिए ड्रिलिंग का काम भी शुरू किया जा चुका है। इसे करने के लिए लगभग 13 देशों के 33 वैज्ञानिकों की टीम होंग-कोंग से 7 फरवरी को रवाना हुई थी। टीम में अमेरिका, फ्रांस, इंटली और जापान के वैज्ञानिक भी शामिल हैं। चीनी मीडिया के मुताबिक पहले ड्रिल का काम पूरा हो चुका है जिसमें समुद्रतल से लगभग 3,770 मीटर नीचे तक ड्रिल किया जा चुका है। वहीं दूसरे ड्रिल का काम भी शुरू हो चुका है।

ड्रिलिंग या ऑब्जरवेशन प्लैटफॉर्म की लोकेशन क्या होगी इसकी जानकारी देने से इंस्टिट्यूट ऑफ अकूस्टिक ने इंकार कर दिया। गौरतलब है कि चीन साउथ चाइना सी के लगभग सभी हिस्सों पर अपनी दावेदारी करता रहा है। दरअसल इस इलाके में तेल और प्राकृतिक गैसों का बड़ा भंडार है और यहां पर समुद्री ट्रैफिक भी अच्छी संख्या में मौजूद है। ऐसे में चीन का इस क्षेत्र को लेकर मलेशिया, फिलिपीन्स, वियतनाम के अलावा ताइवान और ब्रूनेई जैसे देशों से विवाद जारी है। वहीं ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक वैज्ञानिकों की रिपोर्ट में कहा गया है कि अंडरवॉटर ऑब्जरवेशन प्लैटफॉर्म का इस्तेमाल समुद्र के चीने फिजिकल, केमिकल और जियोलॉजिकल डायनैमिक्स को मॉनिटर करने के लिए और कुछ और कामों को करने के लिए किया जाएगा।

वहीं हाल ही में साउथा चाइना सी कि निगरानी के लिए चीन द्वारा अपना तीसरा युद्धपोत तैयार करने की खबर भी सामने आई थी। क्षेत्र पर अपनी दावेदारी के लिए चीनी एक्सपर्ट्स ने कहा था कि उसे निगरानी के लिए 5-6 युद्धपोतों की जरूरत है जिन्हें वह जल्द ही बनाएगा। चीनी डिफेंस मिनिस्ट्री द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक युद्धपोत 001A बनाने में बेहद एडवांस कैटापुल्ट टेक्नॉलिजी का इस्तेमाल हो रहा है।

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