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इतिहास का सबसे खतरनाक स्नाइपर: सोवियत के खिलाफ किसान ने उठाया हथियार तो ली थी 500 से ज्यादा जान

सिमो सफेद मास्क और जैकेट पहनकर -20C के तापमान में अपने आप को छुपा लेते थे। सिमो ने उस दौरान एक दिन में करीब 25 लोगों को मारा था।
इस किसान को मौत की मशीन या व्हाइट डेथ के नाम से जाना जाने लगा था।

मौत की मशीन या व्हाइट डेथ, शायद ही इस इंसान ने कभी सोचा होगा कि लोग उसे इन नामों से याद रखेंगे। यह कहानी है उस इंसान की जो किसानी छोड़कर 500 से ज्यादा लोगों की जान लेकर लिया बदला और बन गया इतिहास का सबसे खतरनाक स्नाइपर। 5 फुट की लंबाई और चेहरे मुस्कान लेकर सोवियत संघ के खिलाफ हथियार उठाए तो रूस में कहलाया मौत की मशीन। चलिए बताते हैं साउथ फिनलैंड के इस किसान की रोमांचक कहानी। जानिए आखिर कैसे किसान बना इतिहास का खतरनाक स्नाइपर?

हम बात कर हैं 17 दिसंबर 1905 को ईस्ट फिनलैंड के करेलिया में जन्मे सिमो हेहा की। सिमो ने सन् 1939-40 में सोवियत संघ के खिलाफ हथियार उठाए थे। सिमो ने रूस और सोवियत संघ के बीच सर्दियों के दौरान हुए युद्ध में 505 सोवियत जवानों को मौत के घाट उतारा था। सिमो ने इस जंग में अहम भूमिका निभाई थी।

जहां इस जंग में सोवियत के करीब 126,900 जवान मारे गए थे वहीं उनमें से 505 जवानों को सिमो ने मारा था। वहीं इस जंग में आजादी की खातिर तकरीबन 25,900 फिनलैंडवासी भी मारे गए थे।

इस जंग में पेशे से किसान सिमो हेहा को सफेद मौत कहा जाने लगा था। सिमो सफेद मास्क और जैकेट पहनकर -20C के तापमान में लड़ते थे। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सिमो ने उस दौरान एक दिन में करीब 25 लोगों को मारा था। वह बर्फ में इस तरह अपने आप को छुपा लेते थे जिससे कोई उन्हें देख भी नहीं पाता था।

जंग खत्म होने के बाद सिमो हेहा दोबारा किसानी करने लगे थे। उनका नया घर फिनलैंड-रूस के बोर्डर रुओकोलाहती था। जंग खत्म होने के तकरीबन 15 साल बाद 96 वर्षीय सिमो हेहा का निधन हुआ था लेकिन आज भी उन्हें एक लीजेंड के रूप में देखा जाता है।

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