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सिक्किम विवाद: चीनी अखबार ने लिखा- अमेरिका दौरे के जरिए मोदी ने दिखाया कि वह चीन को रोकेंगे

चीन में एक सरकारी समाचार पत्र ने आज एक लेख में कहा कि सिक्किम क्षेत्र में एक सड़क बनाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका की यात्रा से पहले भारत के आपत्ति जताने का मकसद वाशिंगटन को यह दर्शाना था कि वह चीन के उदय को ‘‘रोकने’’ के लिए ‘‘कृत संकल्प’’ है।

Author Updated: July 3, 2017 5:57 PM
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (बाएं) और अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (फाइल फोटो)

चीन में एक सरकारी समाचार पत्र ने आज एक लेख में कहा कि सिक्किम क्षेत्र में एक सड़क बनाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका की यात्रा से पहले भारत के आपत्ति जताने का मकसद वाशिंगटन को यह दर्शाना था कि वह चीन के उदय को ‘‘रोकने’’ के लिए ‘‘कृत संकल्प’’ है। ग्लोबल टाइम्स ने एक लेख में कहा, ‘‘मोदी ने ट्रंप के साथ अपनी बैठक की तैयारी के लिए दो कदम उठाए। पहला, उन्होंने अमेरिका के साथ हथियार सौदा किया। हथियार सौदे से अमेरिका को भारत से भारी मौद्रिक लाभ ही नहीं होगा बल्कि इससे चीन पर नजर रखने के लिए भारत-प्रशांत क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत होगी।’’ सरकारी थिंक टैंक शंघाई इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज में वरिष्ठ फेलो ने लियू जोंग्यी ने अपने लेख में लिखा, ‘‘दूसरे कदम का मकसद अमेरिका को यह दर्शाना है कि चीन के उदय को रोकने के लिए भारत कृत संकल्प है।

उन्होंने डोकलाम में जारी गतिरोध पर कहा, ‘‘उदाहरणार्थ, भारतीय बलों ने चीन-भारत सीमा के विवादित सिक्किम क्षेत्र को पार किया और मोदी की अमेरिका यात्रा से कुछ दिन पहले चीनी र्किमयों को सड़कों का निर्माण करने से रोका।’’ लेख में कहा गया है कि इसके अलावा, भारत सरकार ने चीनी उत्पादों के संबंध में डॉपिंग विरोधी जांच शुरू की है। मोदी प्रशासन चीन-भारत संबंधों की कीमत पर अमेरिकी सहयोग चाहता है और उसने चीन के उदय को रोकने के लिए नेतृत्व किया है।

नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार डोकलाम घटना 16 जून को हुई जबकि चीनी विदेश मंत्रालय ने दावा किया है कि भारतीय बलों ने पीपल्स लिबरेशन आर्मी के जवानों को सड़क निर्माण से 18 जून को रोका था। मोदी ने 25 से 27 जून तक अमेरिका की यात्रा की थी। लेख में मोदी की अमेरिका यात्रा को अधिक तवज्जो नहीं देते हुए कहा गया है कि ‘‘बैठक से सीमित परिणाम मिलने के मद्देनजर’’ यह ‘‘ऐतिहासिक घटना नहीं थी, जैसा कि भारत में कुछ मीडिया संस्थानों ने इसे पेश किया था। ’’ इसमें साथ ही कहा गया है कि मोदी ने ट्रंप के साथ ‘‘अपेक्षाकृत सामंजस्यपूर्ण’’ संबंध स्थापित किए हैं।  लेख में कहा गया है, ‘‘दोनों ने अपने भाषणों में एक दूसरे की प्रशंसा की और दोनों देशों के बीच विवादों पर बात करने से बचने के लिए हर संभव प्रयत्न किया।

इसमें कहा गया है, ‘‘दोनों देशों ने रक्षा सहयोग एवं आतंकवाद के खिलाफ सहयोग में अपने हितों को एकीकृत किया है। चीन के बढ़ते प्रभावों की काट के लिए अमेरिका भारत का समर्थन करता है लेकिन वह चीन को नाराज करने की कोशिश नहीं करता है क्योंकि ट्रंप को अब भी कई मामलों में चीन की मदद की आवश्यकता है।’’ हिज्बुल मुजाहिदीन के नेता सैयद सलाहुद्दीन को अमेरिका की ओर से ‘‘वैश्विक आतंकवादी’’ घोषित करने के मामले पर लेख में कहा गया है कि यह अमेरिका के इस नजरिए के अनुरूप है कि ‘‘पाकिस्तान विवाद के समाधान में अहम होने के बजाए क्षेत्रीय विवादों का स्रोत है।’

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