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गर्भवती छात्रा के परीक्षा में बैठने पर स्कूल प्रशासन ने लगाया प्रतिबंध, कहा- गर्भवती होना अनैतिक है

स्कूल पर लोगों और राष्ट्रीय गर्भपात विरोधी संगठनों ने दबाव भी बनाया, लेकिन हेरिटेज एकेडमी नाम के इस स्कूल का कहना है कि मैडी ने शारीरिक संबंध बनाकर स्कूल के नियमों का उल्लंघन किया है।
छात्रा का कहना है कि अन्य कई छात्रों ने स्कूल के नियम तोड़े हैं लेकिन उन्हें कभी ऐसी सजा नहीं दी गई। (फोटो सोर्स स्टूडेंट ऑफ लाइफ)

अमेरिकी राज्य मैरीलैंड में स्थित एक ईसाई स्कूल ने एक छात्रा पर इसलिए प्रतिबंध लगा दिया क्योंकि वह गर्भवती हो गई। स्कूल ने छात्रा मैडी रंक्लेस को अगले हफ्ते होने वाली स्नातक परीक्षा में आने से मना कर दिया। स्कूल पर लोगों और राष्ट्रीय गर्भपात विरोधी संगठनों ने दबाव भी बनाया, लेकिन हेरिटेज एकेडमी नाम के इस स्कूल का कहना है कि मैडी ने शारीरिक संबंध बनाकर स्कूल के नियमों का उल्लंघन किया है। मंगलवार शाम मैडी के घर भेजे गए अपने लेटर में स्कूल प्रिंसिपल डेविड होब्स ने कहा कि मैडी रंक्लेस ने नियमों को तोड़ा है। ऐसा इसलिए नहीं है कि रेंक्लेस गर्भवति हो गई हैं बल्कि उन्हें इसलिए निकाला गया है कि ये अनैतिक है। लेटर में आगे कहा कि अब उसके प्यार करने का सबसे अच्छा तरीका ये है कि उसे नैतिकता के लिए जवाबदेह ठहराया जाए। बता दें कि 18 साल की मैडी रंक्लेस साल 2009 से इस ईसाई स्कूल में पढ़ रही हैं। मैडी को साल जनवरी में पता चला कि वो गर्भवति है।

जिसके बाद उन्होंने इसकी जानकारी स्कूल प्रशासन को दी। जहां उनके पिता फरवरी में स्कूल बोर्ड के सदस्य थे। जिसके बाद स्कूल प्रशासन ने रंक्लेस को बताया कि उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है। वहीं स्कूल ने उन्हें स्कूल काउंसिल अध्यक्ष पद से भी हटा दिया। जिससे उन्हें अपना पूरा साल घर में ही बिताने को कहा गया। बाद में फैमिली की गुजारिश के बाद स्कूल ने रेंक्लेस को क्लास के 14 छात्रों के साथ स्कूल पूरा करना की अनुमति दे दी। हालांकि स्कूल ने कहा कि उन्हें अन्य सीनीयर छात्रों के सामने ग्रेजुएशन डिग्री नहीं दी जाएगी। वहीं परिवार का इस मामले में कहना है कि स्कूल का फैसला गलत है और स्कूल के अन्य छात्रों को नियम तोड़ने पर ऐसी सजा नहीं दी गई थी।

वहीं बीते बुधवार(24 मई, 2017) को एक टेलीफोन साक्षात्कार में रेंक्लेस ने कहा, ‘क्योंकि मैं गर्भवति हूं इसिलए तुम मेरी गलती का परिणाम देख सकते हो। स्कूल में कई छात्रों ने नियम तोड़े, अन्य छात्रों को परेशान किया जिसपर उन्हें जेल भेजा गया। लेकिन उन्हें स्कूल आने की अनुमति दे दी गई। स्कूल अपनी प्रतिष्ठा को लेकर चिंतित था। लेकिन मेरा मानना है कि ईसाई स्कूल समर्थ जीवन का उदाहरण पेश करने के लिए एक अविश्ववनीय मौका गवां रहे है कि लड़के और लड़कियों के साथ किस तरह से पेश आया जाए।’

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