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ISIS की थी सेक्स गुलाम, अब है मानव तस्करी के खिलाफ यूएन की सद्भावना राजदूत

नादिया जब 19 साल की थी, तभी इराक के उसके पैतृक गांव से आईएस के आतंकियों ने साल 2014 में उसे उठा लिया था। गैर मुस्लिम याजिदी समुदाय की होने की वजह से उसे भयंकर यातनाएं झेलनी पड़ी।

Author Updated: September 16, 2016 4:32 PM
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून के साथ नादिया मुराद (फाइल फोटो)

नादिया मुराद, जिसने कभी आतंकी संगठन आईएसआईएस की सेक्स गुलाम बनकर यातनाएं झेलीं वो अब संयुक्त राष्ट्र की सद्भावना राजदूत चुनी गई हैं। यूएन ने मानव तस्करी के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के लिए नादिया का चुनाव शुक्रवार, 16 सितंबर, 2016 को किया है। वो दुनियाभर में मानव तस्करी के शिकार लोगों को अच्छा जीवन जीने के लिए प्रेरित करेंगी। नादिया जब 19 साल की थी, तभी इराक के उसके पैतृक गांव से आईएस के आतंकियों ने साल 2014 में उसे उठा लिया था। गैर मुस्लिम याजिदी समुदाय की होने की वजह से उसे भयंकर यातनाएं झेलनी पड़ी। उसकी आंखों के सामने उसके पिता और भाई की हत्या कर दी गई। पहले वह तीन महीने तक बंधक रही। इस दौरान उसकी कई बार पिटाई की गई और उसका बलात्कार हुआ। एक बार वह भागने की कोशिश करती हुई पकड़ी गई। उस समय उसके साथ 6 लोगों ने तबतक सामूहिक बलात्कार किया जबतक कि वह बेहोश नहीं हो गई। बाद में वह किसी तरह भागकर जर्मनी में शरण लेने में कामयाब हुई। यहीं उसका इलाज भी किया गया।

नादिया ने साल 2015 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए अपनी जिंदगी की कड़वी सच्चाई को बेपर्दा किया। उसकी इस कहानी से उत्तरी इराक में आईएस के आतंक की कहानी को दुनिया ने जाना। उसने बताया कि आईएस के आतंकियों ने उसे सेक्स गुलाम के तौर पर वहां से उठाया था। उसके बाद उसकी जिंदगी बदतर होती गई, इतनी बदतर जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। नादिया ने अमल क्लूनी से भी संपर्क किया है जो उसका और उस जैसी आईएस की शिकार हुई कई महिलाओं का मुकदमा इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट में लड़ेंगे। नादिया की पर्सनल वेबसाइट के मुताबिक, अब वो ऐसी महिलाएं एवं बच्चों के कल्याण के लिए काम कर रही है जो जाति या नस्लीय संघर्ष या उत्पीड़न या मानव तस्करी की शिकार हैं। वो उनकी जिंदगी को फिर से पटरी पर लाने के अपने मिशन पर जोर-शोर से लगी हुई हैं। संयुक्त राष्ट्र से मिला नया पद उनके सपनों को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

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