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पाकिस्‍तान के बड़े नेताओं और पूर्व राजनयिकों ने कहा- फेल हुई शरीफ सरकार, उसके पास नहीं हैं ज्‍यादा विकल्‍प

पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री सरदार आसिफ अहमद अली ने कहा, 'पाकिस्तान के पास कूटनीतिक मोर्चे पर भारत की इस कार्रवाई का जवाब देने के लिए बहुत ही सीमित विकल्प हैं। हम इस मामले में कुछ ज्यादा नहीं कर सकते।'

एलओसी पर हुई झड़प में मारे गए पाकिस्तानी सैनिक के शव के साथ पाकिस्तानी सेना के जवान। (AP Photo/Abdul Majid)

पाकिस्तान के वरिष्ठ राजनीतिज्ञों और पूर्व राजनयिकों ने भारतीय सेना द्वारा पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक करने के और सार्क समिट स्थगित होने के बाद नवाज शरीफ सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उनका मानना है कि भारत की इस कार्रवाई का जवाब देने के लिए पाकिस्तान के पास बहुत ही सीमित विकल्प हैं, चाहे वो एलओसी पर कार्रवाई कर जवाब देने की बात हो या फिर कूटनीतिक मार्चे पर। पाकिस्तानी अंग्रेजी अखबार ‘द नेशन’ से हुई बातचीत में सार्क समिट के टलने के मुद्दे पर बोलते हुए पूर्व विदेश मंत्री सरदार आसिफ अहमद अली ने कहा, ‘पाकिस्तान के पास कूटनीतिक मोर्चे पर भारत की इस कार्रवाई का जवाब देने के लिए बहुत ही सीमित विकल्प हैं। हम इस मामले में कुछ ज्यादा नहीं कर सकते।’ उन्होंने भारतीय सेना द्वारा पीओके में घुसकर की गई सर्जिकल स्ट्राइक को मौजूदा सरकार की ‘कूटनीतिक लापरवाही’ और ‘खराब नीतियों’ का नतीजा बताया है।

पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री सरदार आसिफ ने कहा ‘भारत वांशिगटन डीसी में हमारे देश के खिलाफ समर्थन जुटाने और हमें बदनाम करने में लगा हुआ है। लेकिन हम उसे ऐसा करने से रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहे हैं।’ लाइन आॅफ कंट्रोल पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई फायरिंग और बढ़े तनाव पर आसिफ ने कहा, ‘यह बहुत ही आशा देने वाली बात है कि भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ी तकरार पर विश्व शक्तियों की नजर है और उनकी तरफ से दोनों देशों के बीच स्थिति सामान्य करने का प्रयास भी किया जा रहा है।’आसिफ ने माना कि दोनों देशों के बीच स्थिति काफी नाजुक स्तर पर पहुंच गई है और किसी भी पक्ष की तरफ से एक गलतफहमी या गलत अनुमान युद्ध को न्यौता दे सकता है।

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वहीं, अमेरिका में पाकिस्तान की पूर्व राजदूत आबिदा हुसैन ने कहा कि भारत ने सार्क के सदस्य देशों को पाकिस्तान के खिलाफ एकजुट करने में सफलता अर्जित कर ली है। यदि पाकिस्तान उन देशों को सार्क समिट में शामिल होने के लिए मना नहीं पाया तो यह उसके लिए बहुत बड़ी विफलता होगी।’ उन्होंने कहा कि विश्व के अन्य देशों का पाकिस्तान के प्रति नजरिया बदलने एक मात्र तरीका प्रभावी कूटनीतिक प्रयास है। वहीं, पाकिस्तान के एक अन्य पूर्व शेरी रहमान ने सार्क समिट के टलने को मौजूदा सरकार की कूटनीतिक विफलता करार दिया है।

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