पूर्व पीएम शेख हसीना के बेटे ने कहा कि बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनाव, ‘चुनाव नहीं बल्कि चयन’ होंगे। अवामी लीग के नेता सजीब वाजेद जॉय ने चेतावनी दी कि भले ही बीएनपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरे लेकिन जमात-ए-इस्लामी पर्दे के पीछे से सब कुछ नियंत्रित करेगी। उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप एक कमजोर और बाहरी रूप से प्रभावित सरकार बनेगी।

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे जॉय ने कहा, ”यह चुनाव नहीं, बल्कि चयन प्रक्रिया है। नतीजा पहले से ही तय है।” उन्होंने दावा किया कि बीएनपी को अधिकांश सीट मिलेंगी लेकिन वह एक मजबूत सरकार बनाने में असमर्थ रहेगी, जबकि जमात अपने सीमित मतदाता आधार के बावजूद अनुपात से अधिक सीट हासिल करेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि ढाका में जमात के प्रभाव वाली कमजोर सरकार नयी दिल्ली के लिए गंभीर सुरक्षा चुनौतियां खड़ी कर सकती है।

सोमवार को ‘इंशाल्लाह बांग्लादेश – द स्टोरी ऑफ अनफिनिश्ड रिवोल्यूशन’ नामक पुस्तक पर आयोजित चर्चा में डिजिटल माध्यम से हिस्सा लेते हुए जॉय ने आरोप लगाया कि चुनाव परिणाम ‘पूर्व-निर्धारित’ है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा इसलिए है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत न मिले जिससे जमात के प्रभुत्व वाली गठबंधन राजनीति का मार्ग प्रशस्त हो सके।

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‘अल-कायदा और लश्कर के आतंकवादी बांग्लादेश में खुलेआम घूम रहे’

शेख हसीना के बेटे ने दावा किया कि अल-कायदा और लश्कर-ए-तैबा के आतंकवादी बांग्लादेश में खुलेआम घूम रहे हैं और आगामी चुनाव के लिए प्रचार कर रहे हैं। बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए जॉय ने दावा किया कि न केवल अवामी लीग प्रतिबंधित है बल्कि अन्य प्रगतिशील राजनीतिक दल भी अघोषित प्रतिबंध के अधीन हैं।

इस मुकाबले को बीएनपी और जमात के बीच दो-तरफ़ा मुकाबला बताते हुए, जॉय ने चेतावनी दी कि खंडित जनमत संग्रह अगली सरकार को कमजोर कर देगा। यह दावा करते हुए कि जमात सरकार न भी बनाए, फिर भी बाहर से अपना प्रभाव डालेगी।

जमात का बाहरी प्रभाव बना रहेगा- सजीब जॉय

सजीब जॉय ने कहा, “चाहे बीएनपी सत्ता में आए या न आए, जमात का बाहरी प्रभाव बना रहेगा। बीएनपी अमेरिका की कठपुतली बनकर रह जाएगी। नतीजतन, जमात अपनी मनमानी कर सकेगी। पाकिस्तान को खुली छूट मिल जाएगी। यह भारत की पूर्वी सीमा की सुरक्षा के लिए बेहद चिंता का विषय है।” उन्होंने मांग की कि “सभी अंतरराष्ट्रीय समूहों को चुनावों की निंदा करनी चाहिए।” जॉय ने कहा कि 12 फरवरी को होने वाले चुनाव से यह तय होगा कि बांग्लादेश संवैधानिक लोकतंत्र की ओर बढ़ेगा या चुनावी औपचारिकताओं में छिपी गहरी अस्थिरता की ओर।

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( भाषा के इनपुट के साथ)