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चीनी कॉरिडोर का हिस्‍सा बनने जा रहा सऊदी अरब, ग्‍वादर पोर्ट में खर्च करेगा 70,380 करोड़ रुपए

पाकिस्तान तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से आंशिक रूप से बढ़ते चालू खाते के घाटे से निपटने के लिए निवेश और अन्य वित्तीय सहायता के लिए सऊदी को आकर्षित करना चाहता है।

Author January 13, 2019 3:21 PM
सऊदी अरब के क्राउन प्रिस मोहम्मद बिन सलमान के साथ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान। (फोटो सोर्स एपी)

सऊदी अरब ने पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट में 10 अरब डॉलर (करीब 70380 करोड़ रुपए) की लागत से तेल रिफाइनरी स्थापित करने की योजना बनाई है। सऊदी एनर्जी मिनिस्टर ने शनिवार (12 जनवरी, 2019) को हिंद महासागर बंदरगाह पर बोलते हुए यह बात कही। इस बंदरगाह को चीन की मदद से विकसित किया जा रहा है। पाकिस्तान तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से आंशिक रूप से बढ़ते चालू खाते के घाटे से निपटने के लिए निवेश और अन्य वित्तीय सहायता के लिए सऊदी को आकर्षित करना चाहता है। पिछले साल, सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 6 अरब डॉलर का पैकेज देने की पेशकश की थी। ग्वादर में सऊदी एनर्जी मिनिस्टर खालिद-अल-फलाह ने कहा, ‘सऊदी अरब तेल रिफाइनरी की स्थापना और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे में पाकिस्तान के साथ साझेदारी के माध्यम से पाकिस्तान के आर्थिक विकास को स्थिर बनाना चाहता है। फलाह ने कहा कि क्राउन प्रिस मोहम्मद बिन सलमान फरवरी में पाकिस्तान दौरे पर आएंगे और इस समझौते पर साइन करेंगे। सऊदी मिनिस्टर के मुताबिक सऊदी अरब पाकिस्तान के अन्य क्षेत्रों में भी निवेश करेगा।

बता दें कि ग्वादर में तेल रिफाइनरी की स्थापना के साथ सऊदी अरब सीपीईसी में महत्वपूर्ण साझेदार बन जाएगा। पाकिस्तान के पेट्रोलियम मिनिस्टर गुलाम सरवर खान ने यह बात कही है। जानना चाहिए कि सऊदी न्यूज एजेंसी ने इससे पहले कहा कि फलाह पाकिस्तान पेट्रोलियम मिनिस्टर और समुद्री मामलों के मंत्री अली जैदी से ग्वादर में मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात में कई महत्वपूर्ण मामलों में बातचीत की जानी थी। इसमें अलावा फलाह समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले की व्यवस्था को अंतिम रूप देंगे।

गौरतलब है कि पीटीआई प्रमुख इमरान खान के पिछले साल अगस्त में पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनने के बाद से इस्लामाबाद ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और चीन से आर्थिक सहायता पैकेज हासिल किए हैं। पाकिस्तान प्रधानमंत्री कार्यालय ने बीते गुरुवार को कहा कि इस्लामाबाद को सऊदी अरब संग इस समझौते के होने की उम्मीद है। पिछले साल नवंबर में पाकिस्तान ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ बातचीत को आगे बढ़ाया क्योंकि वह भुगतान संकट के संतुलन से निपटने के लिए 1980 के दशक के बाद से 13वीं बार मदद चाहता है।

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