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सऊदी अरब ने चेताया- ईरान ने बनाया परमाणु बम तो हम भी पीछे नहीं हटेंगे

समाचार एजेंसी रायटर्स के मुताबिक इस इंटरव्यू में मोहम्मद बिन सलमान ने कहा, " सऊदी अरब किसी तरह के न्यूक्लियर हथियार को हासिल नहीं करना चाहता है, लेकिन यदि ईरान परमाणु बम बनाता है तो सऊदी अरब बिना संकोच के न्यूक्लियर बम जितना जल्द हो सके बनाएगा।"

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान। (फाइल फोटो)

दुनिया से परमाणु हथियारों को खत्म करने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों के बीच सऊदी अरब ने अपने चिर प्रतिद्वंदी ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। सऊदी अरब ने कहा है कि अगर ईरान परमाणु बम बनाता है तो सऊदी अरब बिना संकोच के न्यूक्लियर बम हासिल करेगा और वह इस लक्ष्य को जल्द से जल्द हासिल करेगा। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने एक टेलिविजन इंटरव्यू में यह बयान दिया है। इस इंटरव्यू के कुछ हिस्से गुरुवार (15 मार्च) को जारी किये गये हैं। सीबीएस द्वारा लिये गये इस इंटरव्यू का प्रसारण रविवार को होगा। समाचार एजेंसी रायटर्स के मुताबिक इस इंटरव्यू में मोहम्मद बिन सलमान ने कहा, ” सऊदी अरब किसी तरह के न्यूक्लियर हथियार को हासिल नहीं करना चाहता है, लेकिन यदि ईरान परमाणु बम बनाता है तो सऊदी अरब बिना संकोच के न्यूक्लियर बम जितना जल्द हो सके बनाएगा।”

खाड़ी देशों में ईरान के साथ प्रभुत्व की लड़ाई लड़ रहे सऊदी अरब इस वक्त अपनी परमाणु ऊर्जा की क्षमता को बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर काम कर रहा है। इस महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का नेतृत्व खुद प्रिंस सलमान कर रहे हैं। सऊदी अरब चाहता है कि आने वाले सालों में तेल पर देश की निर्भरता कम की जाए, और नॉन ऑयल इकोनॉमी की ओर बड़े कदम उठाए जाएं।]

सऊदी अरब के पहले दो बड़े न्यूक्लियर रिएक्टर बनाने की रेस में दुनिया की कई महाशक्तियां शामिल है। इस प्रोजेक्ट के लिए अमेरिका, दक्षिण कोरिया, रूस, फ्रांस और चीन की कंपनियां बोली लगा रही हैं। दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देशों में शुमार सऊदी अरब ने पहले कहा था कि वह परमाणु ऊर्जा तकनीक सिर्फ शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए हासिल करना चाहता है, हालांकि सऊदी अरब के बयान में यह स्पष्टता नहीं थी कि क्या वह न्यूक्लियर ईंधन पैदा करने के लिए यूरेनियम संवर्धन करना चाहता है। यूरेनियम संवर्धन ऐसी प्रक्रिया है जिसके जरिये परमाणु हथियार भी बनाए जा सकते हैं। सऊदी अरब की सरकार ने मंगलवार (13 मार्च) को परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए एक राष्ट्रीय नीति को मंजूरी दी थी, इसमें वैश्विक नियमों के मुताबिक शांतिपूर्ण मकसद के लिए परमाणु गतिविधियों को आगे बढ़ाना शामिल था।

बता दें कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों के लिए चिंता का विषय रहा है। पहले अमेरिका ने इसी मुद्दे को लेकर ईरान पर कई प्रतिबंध लगाये थे। लेकिन 2015 में ईरान ने अमेरिका के साथ परमाणु समझौता किया था और अपने परमाणु कार्यक्रम को नहीं बढ़ाने का वादा किया था। हालांकि ईरान के वादे को अमेरिका, ईरान समेत कई मुल्क शक की दृष्टि से देखते हैं।

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