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मुस्लिम ब्रदरहुड से रिश्‍ते रखने के आरोपी, 20 लाख ट्विटर फॉलोअर्स वाले मौलाना अवाद अल-करनी पर कोर्ट ने कसा शिकंजा

ट्विटर पर अति-सक्रिय मौलाना अवाद अल-करनी पर सऊदी अरब में आतंकी संगठन घोषित मुस्लिम ब्रदरहुड से संबंध का भी आरोप है।

अवाद अल करनी के ट्विटर पर 20 लाख से अधिक फॉलोवर्स हैं।

सऊदी अरब की अदालत ने देश के एक मौलाना अवाद अल-करनी के ट्वीट करने पर पाबंदी लगा दी है। अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि उनके ट्वीट से सामाजिक व्यवस्था बिगड़ सकती है। अल-करनी पर इससे पहले मुस्लिम ब्रदरहुड नामक इस्लामी संगठन से संबंध होने का आरोप लग चुका है। अर-करनी पर एक लाख रियाल (करीब 17 लाख रुपये) का जुर्माना भी लगाया गया है। ओकाज़ न्यूजपेपर के अनुसार इस्लामी अदालत ने ये फैसला गुरुवार (16 मार्च) शाम को सुनाया। ये मौलाना ट्विटर पर काफी लोकप्रिय हैं और उनके 20 लाख से ज्यादा फॉलोवर्स हैं। वो अब तक 46 हजार से ज्यादा ट्वीट कर चुके हैं। सऊदी अरब एक इस्लामिक देश है और यहां इस्लामी शरिया अदालतों में फैसले होते हैं।

पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार अल-करनी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर खुद को मिली सजा की पुष्टि की। अल-करनी ने शुक्रवार (17 मार्च) को अपने फॉलोवर्स को धन्यावद देते हुए ट्विटर पर लिखा, “मुझे यहां लिखने से रोक दिया गया है।” ब्रिटिश स्कॉलर टोबी मैथीसन के अनुसार अल-करनी सऊदी अरब में 1960 और 1970 के दशक में उभरे साहवा आंदोलन (इस्लामी एक्टिविज्म का आधुनिक रूप) के नेताओं में थे।

इस्लामी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड को सऊदी अरब, मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है। स्थानीय मीडिया के अनुसार सऊदी अरब की स्थानीय अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अल-करनी के ट्वीट से “समाजिक व्यवस्था बिगड़ सकती है और लोग वैचारिक रूप से भड़क सकते हैं।” अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अल-करनी के ट्वीट से सऊदी अरब के दूसरे देशों से संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अल-करनी को गिरफ्तार किए बिना उन पर मुकदमा चलाया गया। अल-करनी को साल 2010 में मिस्र की एक अदालत ने मुस्लिम ब्रदरहुड को चंदा देने का दोषी घोषित किया था। मिस्र की अदालत में अल-करनी हाजिर नहीं हुए थे और उन पर गैर-मौजूदगी में मुकदमा चला था।

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