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तेल की गिरती कीमतों से ह‍िला सऊदी अरब, करोड़ों की योजनाओं पर ग‍िर सकती है गाज

सरकार ऐसी परियोजनाअों की सूची बनवा रही है जो 25 फीसदी से कम पूरी हुई हैं।

सऊदी अरब की सरकार ने अपने मंत्रालयों और एजेंसियों से अरबों डॉलर के बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास परियोजनाअों की समीक्षा करने के लिए कहा है। (Reuters)

सउदी अरब में गिर रही तेल की कीमतों के बाद वहां की सरकार को बड़ा झटका लगा है। वहां चल रहे कुछ सरकारी प्रोजेक्ट्स का काम भी रुका पड़ा है इससे ऐसा लग रहा है कि वहां की सरकार के पास धन की कमी होने लगी है। सूत्रों ने कहा कि सऊदी अरब की सरकार ने अपने मंत्रालयों और एजेंसियों से अरबों डॉलर की कीमत वाले बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास परियोजनाअों की समीक्षा करने के लिए कहा है। इसके बाद तय होगा कि परियोजनाअों को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए या फिर पुनर्गठन के लिए पेश किया जाए। इकॉनोमिक टाइम्स के मुताबिक रियाद ब्यूरो ऑफ कैपिटल एंड ऑपरेशनल स्पेंडिंग रैशनलाइजेशन को सरकार को ज्यादा कुशल बनाने के लिए पिछले साल स्थापित किया गया था। यह ऐसी परियोजनाओं की एक सूची तैयार कर रही है जो 25 प्रतिशत से कम पूरी हुई हैं।

इनमें से कुछ प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं जो कि एक दशक पहले शुरू किए गए थे। उस समय कच्चे तेल की कीमत ज्यादा थी। 2014 में जब तेल की कीमतें गिरनी शुरू हुईं तो उसके बाद प्रोजेक्ट्स का काम रोक दिया गया। इसके बाद इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए रियाद के पास धन जुटाना मुश्किल हो रहा है। वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान ने इसी साल फरवरी में कहा था कि दक्षता ब्यूरो ने अभी तक 80 अरब रियाल (21.33 बिलियन डॉलर) बचाए हैं। अधिकारी सरकार के सुधार अभियान में इन परियोजनाओं का अध्ययन करेंगे, जिसका उद्देश्य तेल निर्यात के अलावा अर्थव्यवस्था में कैसे मजबूती लाई जाए इसपर फोकस करेंगे। इसके अलावा वह तय करेंगे कि इन प्रोजेक्ट्स को अनिश्चित काल के लिए निलंबित कर दिया जाए या फिर कैसे इन्हें पूरा किया जाए।

इकॉनोमिक टाइम्स के सूत्रों के मुताबिक कुछ प्रोजेक्ट्स को प्राइवेट सेक्टर के साथ पार्टनर्शिप करके पुनर्वासित किया जा सकता है। इन प्रोजेक्ट्स को बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) के तहत भी पूरा किया जा सकता है। बीओटी के तहत निजी निवेशक परियोजनाओं को पूरा करते हैं। साथ ही वह प्रोजेक्ट पूरा करने के बाद उससे पैसा कमाते हैं। इसके बाद वह इसका स्वामित्व सरकार को दे देते हैं। इसलिए रियाद इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए निजी कंपनियों को परियोजनाओं में लाने पर विचार कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक मौजूदा आर्थिक उद्देश्यों को पूरा नहीं करने वाली कुछ परियोजनाओं को निलंबित किया जा सकता है। कुछ परियोजनाओं के लिए सिफारिशें कुछ दिन में ही आ सकती हैं। सरकार शक्ति और जल जैसी मजबूत सामाजिक कल्याण और व्यवसायिक औचित्य वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता दे सकती है, जबकि खेल के बुनियादी ढांचे, कुछ परिवहन व्यवस्था और संभवत: परमाणु ऊर्जा को कम कर सकती है।

 

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