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सऊदी अरब के शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आतंकवाद निरोधक गठबंधन के बारे में बताया

तेल की प्रचुरता वाले सऊदी अरब को इस्लाम का आध्यात्मिक स्थल माना जाता है और हाल ही में उसने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए 34 देशों का गठबंधन बनाया था।

Author रियाद | April 4, 2016 9:07 PM
रियाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सऊदी अरब के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजते वहां के शाह सलमान बिन अब्दुल अजीज। (पीटीआई फोटो)

सऊदी अरब के शाह सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सौद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आतंकवाद विशेष तौर पर आईएसआईएस के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले 34 इस्लामिक देशों के मजबूत सैन्य गठबंधन के बारे में बताया। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ अभियान को बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया। रविवार (3 अप्रैल) को अल यामामह महल में हुई चर्चा के दौरान सऊदी शाह ने खाड़ी क्षेत्र और इस क्षेत्र के देशों में स्थायित्व को समर्थन देने में भारत की रुचि की सराहना की। सऊदी अधिकारियों ने कहा कि शाह ने प्रधानमंत्री को आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए हाल ही में बनाये गए गठबंधन की दिशा में सऊदी पहल के बारे में बताया।

तेल की प्रचुरता वाले सऊदी अरब को इस्लाम का आध्यात्मिक स्थल माना जाता है और हाल ही में उसने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए 34 देशों का गठबंधन बनाया था। यह गठबंधन उस समय बना जब ऐसी आलोचनाएं सामने आई कि अरब देश इस क्षेत्र में आईएसआईएस पर लगाम लगाने की दिशा में पर्याप्त पहल नहीं कर रहे हैं। सऊदी अरब द्वारा आतंकवाद के खिलाफ बनाये गए 34 देशों के गठबंधन में तुर्की, मिस्र, पाकिस्तान, जार्डन, मलेशिया, नाइजीरिया और ट्यूनिशिया आदि शामिल हैं। इस गठबंधन में हालांकि सऊदी  अरब का प्रतिद्वन्द्वी ईरान शामिल नहीं है। आईएस के खिलाफ लड़ रहे इराक और सीरिया भी इस गठबंधन में शामिल नहीं हैं। दोनों देशों ने सभी देशों से अपील की कि वे आतंकवाद का किसी भी तरह का समर्थन और वित्त पोषण करना बंद करें और अपनी भूमि से अन्य देशों के खिलाफ आतंकी कार्रवाई न होने दें और ऐसा करने वालों को न्याय के कटघरे में खड़ा करें।

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सऊदी अरब पाकिस्तान का नजदीकी सहयोगी है और उसके द्वारा आतंकवाद की कड़ी निंदा को भारत की चिंताओं के संदर्भ में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत और सऊदी अरब आतंकवाद के विरुद्ध द्विपक्षीय और संयुक्त राष्ट्र की बहुपक्षीय व्यवस्था में सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने पर आज सहमत हुए। दोनों ने अन्य देशों से दूसरे देशों के खिलाफ आतंकवाद के इस्तेमाल को नामंजूर करने की अपील की और दुनिया के देशों से आतंकवाद के ढांचे को खत्म करने का आह्वान किया। दोनों देशों के बीच हुए समझौतों में धन शोधन, आतंकियों के वित्त पोषण एवं उससे जुड़े अपराध के बारे में खुफिया सूचनाओं के आदान प्रदान के बारे में भी एक समझौता हुआ।

सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने शाह का हवाला देते हुए कहा, ‘‘हम आतंकवाद के खिलाफ पहल के क्षेत्र में आपके देश की सरकार के साथ सहयोग और समन्वय को महत्व देते हैं। हमें विश्वास है कि हमारी चर्चाओं से विभिन्न क्षेत्रों में हमारे संबंध और सहयोग दोनों देशों के बीच सामरिक संबंधों को हासिल करने में सहायक होंगे जो हमारे साझा हितों का पोषण करेंगे।’’

दोनों पक्षों ने कारोबार एवं निवेश बढ़ाने विशेष तौर पर ऊर्जा और आधारभूत ढांचा क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा की। दोनों पक्ष इस बात पर भी सहमत हुए कि वे संयुक्त राष्ट्र में भारत द्वारा प्रस्तावित व्यापक अंतराष्ट्रीय आतंकवाद निरोधी संधि को अपनाने के बारे में मिलकर काम करेंगे। दोनों देशों ने नौवहन क्षेत्र समेत रक्षा सहयोग को बढ़ाने का निर्णय किया और ऊर्जा एवं आधारभूत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की जिसे दोनों के बीच संबंधों की घनिष्टता बढ़ने के तौर पर देखा जा रहा है। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने आतंकवाद को किसी खास धर्म, पंथ या संस्कृति से जोड़ने के प्रयासों को पूरी तरह से खारिज किया और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की जिसमें आतंकवाद और कट्टरपंथ के लिए साइबर स्पेस के इस्तेमाल पर रोक लगाने की पहल शामिल है।

इस बीच, सऊदी अरब की मीडिया में मोदी की यात्रा को काफी स्थान दिया गया। सऊदी अरब के राष्ट्रीय दैनिक अरब न्यूज ने दो अप्रैल को मोदी के आगमन के दिन छह पन्नों का विशेष संस्करण पेश किया जिसमें विविध क्षेत्रों में भारत और सऊदी अरब के संबंधों पर लेख शामिल हैं।

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