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उपग्रहीय सूचना से मिले संकेत- भारत में गहरा सकता है पानी का संकट

अमेरिका स्थित पर्यावरण संगठन, डेल्टारेस, डच सकार व अन्य साझेदारों के साथ मिलकर जल व सुरक्षा संबंधी पूर्व चेतावनी पर काम कर रहा है जिसका मकसद सामाजिक स्थिरता, आर्थिक नुकसान और सीमापार आव्रजन का आकलन करना है।

Author लंदन | April 13, 2018 9:47 PM
इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

उपग्रहीय सूचना-संकेतों से चेतावनी मिली है कि स्पेन, मोरक्को और इराक समेत भारत में जलाशयों के सूखने से आगे पानी का संकट गहरा सकता है। मध्यप्रदेश स्थित इंदिरा सागर बांध और गुजरात के सरदार सरोवर जलाशय के जल स्तर में कमी आई है जिसकी वजह बरसात में कमी बताई जा रही है। इन जलाशयों से लाखों लोगों को पीने का पानी मिलता है। अंग्रेजी अखबार ‘गार्जियन’ ने की गुरुवार की रपट के मुताबिक, उपग्रह से प्राप्त संकेतों के आधार पर पूर्वानुमान जाहिर करने वालों के अनुसार, जलाशयों के सिकुड़ने से आगे पानी का संकट बढ़ सकता है। वर्ल्ड रिसोर्सेस इंस्टीट्यूट (डब्ल्यूआरआई) के मुताबिक, बढ़ती मांग, कुप्रबंधन और जलवायु परिवर्तन के कारण कई अन्य देश भी इसी प्रकार के संकट के जूझ रहे हैं।

अमेरिका स्थित पर्यावरण संगठन, डेल्टारेस, डच सकार व अन्य साझेदारों के साथ मिलकर जल व सुरक्षा संबंधी पूर्व चेतावनी पर काम कर रहा है जिसका मकसद सामाजिक स्थिरता, आर्थिक नुकसान और सीमापार आव्रजन का आकलन करना है। जाहिर है कि इंदिरा सागर और सरदार सरोवर बांध जलाशय को पानी नर्मदा नदी से मिलता है। पिछले साल बारिश कम होने से इंदिरा सागर का जल स्तर औसत मौसमी जल स्तर से कम रहा, जोकि अब तक तीसरा सबसे निचला स्तर है।

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वहीं, सरदार सरोवर जलाशय में भी पानी का स्तर घट गया है जिसके बाद पिछले महीने गुजरात सरकार ने जलाशय के पानी से खेतों की सिंचाई रोक दी क्योंकि यहां से तीन करोड़ लोगों को पीने का पानी मिलता है। वहीं, जल संसाधन मंत्रालय के शुक्रवार के बयान के अनुसार, देश के 91 बड़े जलाशयों में 12 अप्रैल को 40.857 बीसीएम पानी था, जोकि इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 25 फीसदी है। इससे पहले पांच अप्रैल को इन जलाशयों में कुल संग्रहण क्षमता का 27 फीसदी पानी था।

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