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COVID-19: रूस की यूनिवर्सिटी ने दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन का सफतलापूर्वक किया सफल ट्रायल

दुनियाभर में इस वक्त कोरोना की दर्जनभर वैक्सीन का ट्रायल जारी है, हालांकि, वैज्ञानिकों ने 2021 तक वैक्सीन बनने और अप्रूव होने का अनुमान जताया है।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र मॉस्को | Published on: July 12, 2020 11:14 PM
प्रतीकात्मक तस्वीर

दुनियाभर में इस वक्त कोरोनावायरस के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। हालांकि, वैज्ञानिकों ने महामारी से निपटने के लिए इसकी वैक्सीन बनाने की कोशिशें भी तेज कर दी हैं। अभी दुनियाभर में दर्जनभर से ज्यादा वैक्सीन ह्यूमन ट्रायल स्टेज में पहुंच चुकी हैं। हालांकि, रूस से एक बेहतरीन खबर सामने आई है। यहां की एक यूनिवर्सिटी में कोरोनावायरस के वैक्सीन का ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।

मॉस्को स्थित सेशेनोव स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी के मेडिसिन डिपार्टमेंट के डायरेक्टर वादिम तारासोव ने इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन का पहला ह्यूमन ट्रायल सफल रहा है और पहले बैच के वॉलंटियर्स को बुधवार और दूसरे बैच को 20 जुलाई तक डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।

बताया गया है कि यूनिवर्सिटी ने रूस के गमलेई इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी की तरफ से मिली वैक्सीन का 18 जून को ट्रायल शुरू कर दिया था। इसके बाद कोरोना की इस पहली वैक्सीन का ट्रायल एक महीने से भी कम समय में पूरा हो गया। सेशेनोव यूनिवर्सिटी में इंस्टीट्यूट ऑफ पैरासाइटोलॉजी के निदेशक एलेक्जेंडर लुकाशेव ने कहा कि वैक्सीन की सुरक्षा से जुड़े मानक पूरे कर लिए गए हैं। वैक्सीन के आगे के डेवलपमेंट का काम भी शुरू हो चुका है। अब देश में महामारी के हालात और उत्पादन बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।

गौरतलब है कि दुनिया में अब तक कोरोना की दर्जनभर वैक्सीन का क्लिनिकल ट्रायल पूरा हो चुका है। इनमें ज्यादातर वैक्सीन अमेरिका में टेस्ट हो रही हैं। इसके अलावा भारत में भी चार वैक्सीन ह्यूमन ट्रायल स्टेज में हैं। इनमें एक भारत बायोटेक की कोवैक्सिन है, जबकि एक अन्य वैक्सीन जायडस कैडिला कंपनी बना रही है। इसके अलावा दो अन्य भारतीय कंपनियां क्लिनिकल ट्रायल में जुटी हैं। हालांकि, इतनी वैक्सीन की टेस्टिंग के बावजूद दुनियाभर के वैज्ञानिक फाइनल कोरोना वैक्सीन आने में 2021 तक का अनुमान जता रहे हैं।

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