रूस ने कहा है कि उसे भारत की ओर से ऐसा कोई संदेश नहीं मिला है कि मोदी सरकार उससे तेल खरीद पर रोक लगाने जा रही है। रूस ने यह बयान जारी करके अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा किए गए दावों को खारिज कर दिया है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने साफ कहा कि भारत द्वारा लिए गए ऐसे किसी भी फैसले की जानकारी मॉस्को को नहीं मिली है। रूसी मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, दिमित्री पेस्कोव ने यह भी कहा कि रूस चाहता है कि भारत के साथ उसके मजबूत संबंध बने रहें।
डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा था कि भारत और अमेरिका ट्रेड डील पर सहमत हो गए हैं। ट्रंप ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बात पर भी सहमत हो गए हैं कि भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा।
ट्रंप का कहना था कि अमेरिका और वेनेजुएला से ज्यादा तेल खरीदने पर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सहमति दे दी है।
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स्थिति पर है नजर- नोवाक
रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा कि सरकार स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद को बंद करने के मामले में अमेरिका की ओर से बयान देखने को मिले हैं।
रूस के ऊर्जा मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि उन्हें भारतीय रिफाइनरी कंपनियों से अनुबंध रद्द करने के संबंध में कोई सूचना नहीं मिली है।
रूस से तेल खरीदने पर लगा दिया था 25 प्रतिशत टैरिफ
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका रेसिप्रोकल टैरिफ 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। पिछले साल ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। इसमें रूस से तेल खरीदने पर लगाया गया 25 प्रतिशत टैरिफ भी शामिल था। भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा दूसरे देशों से खरीदता है, जिसे पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधनों में बदला जाता है।
साल 2021 तक भारत द्वारा आयात किए गए कुल कच्चे तेल में रूसी तेल का हिस्सा मुश्किल से 0.2 प्रतिशत था लेकिन फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिमी देशों द्वारा मॉस्को से दूरी बनाने के बाद भारत रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया।
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