अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या पर रूस और चीन दोनों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मॉस्को और बीजिंग के नेताओं ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए सैन्य अभियानों को तत्काल रोकने का आग्रह किया है। 86 वर्षीय खामेनेई की ईरानी सैन्य और सरकारी ठिकानों पर हुए एक बड़े हवाई हमले में मौत हो गई। उनकी मृत्यु ने इस क्षेत्र को नई अस्थिरता की ओर धकेल दिया है, जिसके चलते ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए हैं।
खामेनेई कानून का ‘घृणित उल्लंघन’ बताया– पुतिन
समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस हत्या को “मानवीय नैतिकता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सभी मानदंडों का एक निंदनीय उल्लंघन” बताया। क्रेमलिन द्वारा प्रकाशित और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान को संबोधित एक पत्र में पुतिन ने खामेनेई की हत्या पर अपनी “गहरी संवेदना” व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि ईरानी नेता को “एक उत्कृष्ट राजनेता के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने मैत्रीपूर्ण रूसी-ईरानी संबंधों के विकास में व्यक्तिगत रूप से बहुत बड़ा योगदान दिया।” पुतिन ने पेजेशकियान से यह भी कहा कि वे “सर्वोच्च नेता के परिजनों और प्रियजनों, सरकार और पूरे ईरान के लोगों के प्रति मेरी गहरी संवेदना और समर्थन व्यक्त करें”। इससे पहले रूस ने अमेरिकी-इजरायली हमलों की निंदा करते हुए इसे एक “खतरनाक दुस्साहस” बताया था जो क्षेत्रीय “विनाश” को जन्म दे सकता है।
हमलों से पहले मॉस्को ने की थी संयम बरतने की अपील
शनिवार को रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की थी। रूसी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह बातचीत “ईरानी पक्ष की पहल पर” हुई थी।
हाल के वर्षों में विशेषकर यूक्रेन में मॉस्को के आक्रमण के बाद, रूस और ईरान के संबंध मजबूत हुए हैं। 2025 में दोनों देशों ने सैन्य मामलों सहित सहयोग को गहरा करने के उद्देश्य से एक रणनीतिक साझेदारी संधि पर हस्ताक्षर किए।
सैन्य अभियानों को तत्काल रोकें- चीन
चीन ने भी इसकी कड़ी निंदा की। एएफपी के अनुसार, बीजिंग ने कहा कि यह हत्या “ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन है, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी मानदंडों का उल्लंघन है”।
विदेश मंत्रालय ने कहा, “चीन इसका कड़ा विरोध करता है और इसकी कड़ी निंदा करता है। साथ ही सैन्य अभियानों को तत्काल रोकने का आह्वान करता है।
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने रूसी पक्ष द्वारा शुरू की गई फोन कॉल में सर्गेई लावरोव से बात की। चीनी सरकारी मीडिया ने यह जानकारी दी।
चीन की समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, बातचीत के दौरान वांग ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़रायल द्वारा “एक संप्रभु नेता की खुलेआम हत्या और सत्ता परिवर्तन के लिए उकसाना अस्वीकार्य है।
उन्होंने आगे कहा कि चीन इस बात से “बेहद चिंतित” है कि मध्य पूर्व को “खतरनाक खाई” में धकेला जा सकता है। वांग ने यह भी चेतावनी दी कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमति के बिना किसी संप्रभु राज्य पर हमला करना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित वैश्विक व्यवस्था को कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को दुनिया के जंगल के कानून की ओर लौटने का विरोध करते हुए एक निश्चित और स्पष्ट संदेश भेजना चाहिए।
चीन ने अपने नागरिकों से कहा- ईरान से तत्काल निकलें
बढ़ते तनाव के बीच बीजिंग ने ईरान में रहने वाले अपने नागरिकों से “जितनी जल्दी हो सके” देश छोड़ने का आग्रह किया है। रविवार को इस आह्वान को दोहराते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीनी पासपोर्ट धारक वीजा-मुक्त भूमि मार्गों से अजरबैजान, आर्मेनिया और तुर्की होते हुए ईरान से बाहर निकल सकते हैं।
समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, यह चेतावनी इस बढ़ती आशंका को दर्शाती है कि ईरान द्वारा इजरायल, अमेरिकी सैन्य ठिकानों और खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइलें दागे जाने के बाद संघर्ष और भी बढ़ सकता है।
व्यापक वैश्विक चिंता
इस हत्या ने मॉस्को और बीजिंग से परे भी चिंता पैदा कर दी है। पोप लियो XIV ने “हिंसा के दुष्चक्र” को समाप्त करने का आह्वान किया और सभी पक्षों से आग्रह किया कि वे स्थिति के “अपूर्णीय खाई” बनने से पहले “नैतिक जिम्मेदारी” के साथ कार्य करें।
पोप ने सेंट पीटर स्क्वायर में अपनी एंजेलस प्रार्थना के दौरान कहा कि स्थिरता और शांति का निर्माण आपसी धमकियों या हथियारों के माध्यम से नहीं होता है, जो विनाश, पीड़ा और मृत्यु बोते हैं, बल्कि केवल तर्कसंगत, वास्तविक और जिम्मेदार संवाद के माध्यम से होता है।
इस बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस अभियान का बचाव किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इन हमलों ने ईरानियों को अपने देश को “वापस लेने” का “सबसे बड़ा मौका” दिया है और तेहरान को आगे और हमले न बढ़ाने की चेतावनी दी है।
बता दें, मॉस्को और बीजिंग की तीखी भाषा भू-राजनीतिक विभाजन के विस्तार को दर्शाती है। रूस और चीन दोनों के ईरान के साथ घनिष्ठ संबंध हैं और उन्होंने इस क्षेत्र में अमेरिका और इज़रायल की कार्रवाइयों की अक्सर आलोचना की है। रूस और ईरान हाल ही में हुए एक रणनीतिक संधि से बंधे हुए हैं और चीन ने “शासन परिवर्तन” के खिलाफ चेतावनी दी है। ऐसे में प्रतिक्रियाएं दर्शाती हैं कि खामेनेई की हत्या न केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा है बल्कि इसके वैश्विक कूटनीतिक परिणाम भी हैं।
अलीरेजा अराफी कौन हैं? जिन्हें खामनेई की मौत के बाद ईरान का सुप्रीम लीडर बनाया गया
ईरान ने अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी को देश का अंतरिम (अस्थायी) सर्वोच्च नेता नियुक्त किया है। यह फैसला उस समय लिया गया है, जब लंबे समय से ईरान के सर्वोच्च नेता रहे अयातुल्लाह अली खामेनेई की शनिवार सुबह तेहरान पर हुए संयुक्त अमेरिका-इजरायल हवाई हमलों में मौत हो गई। पढ़ें पूरी खबर।
