रूस ने होमुर्ज जलमार्ग के बंद होने पर अमेरिका को घेरा है और कहा है कि इसके बंद होने पर उन्हें और उनकी कंपनियों को फायदा पहुंच रहा है। रूस के राष्ट्रपति के करीबी और रोसनेफ्ट के चीफ एग्जीक्यूटिव इगोर सेचिन ने शनिवार को कहा कि होर्मुज जलमार्ग (Strait of Hormuz) के बंद होने से अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों को सबसे अधिक फायदा पहुंचा है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि दुनिया के कुल कच्चे तेल का पांचवां हिस्सा जिस रास्ते से गुजरता है, वहाँ लगातार तनाव बने रहने से तेल की मांग पर बुरा असर पड़ेगा।
फरवरी में अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर हमला करने और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद, ईरान ने इस होमुर्ज जलमार्ग को बंद कर दिया था। यह रास्ता दुनिया की तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा और उर्वरक जैसी जरूरी चीजों के लिए मुख्य जलमार्ग है। हालांकि अमेरिका ने भी ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी, जो अभी भी जारी है।
अमेरिका फायदे के लिए अपने हिसाब से बदल रहा बुनियादी ढांचा
न्यूज एजेंसी रायटर्स के मुताबिक, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी सहयोगी और रूस के एनर्जी सेक्टर के सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक, इगोर सेचिन ने अमेरिका के कदमों को ग्लोबल एनर्जी मार्केट के बुनियादी ढांचे को अपने फायदे के हिसाब से बदलने की कोशिश बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इससे जुड़े रणनीतिक जोखिमों का पूरी तरह से आकलन नहीं किया गया था।
इगोर सेचिन ने सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में कहा, “होर्मुज जलमार्ग को बंद करना अमेरिका के फायदे के लिए ग्लोबल एनर्जी मार्केट के नियमों को बदलने की कोशिश है। इस जलमार्ग को बंद करने के कदम ईरान को निशाना बनाकर उठाए गए थे, लेकिन इनका असर पूरी दुनिया पर पड़ा।”
अमेरिकी कंपनियों को हुआ फायदा
उन्होंने कहा, “इसका मुख्य फायदा अमेरिकी कंपनियों को हुआ, जिन्हें बिना किसी प्रतिस्पर्धा के फायदे मिले और महंगी सप्लाई हासिल करने की क्षमता मिली। होर्मुज जलमार्ग में लंबे समय तक तनाव बने रहने से तेल की मांग पर असर पड़ सकता है। इससे वैकल्पिक ऊर्जा में रुचि भी फिर से बढ़ सकती है।”
रूस की भी कमाई बढ़ी
जानकारी दे दें कि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है, और उसके बाद सऊदी अरब और फिर रूस का नंबर आता है। रूस के वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, रूस के तेल और गैस टैक्स से होने वाली कमाई – जो कुल बजट आय का लगभग पांचवां हिस्सा है – मई में सालाना आधार पर 32.4% बढ़कर 678.9 अरब रूबल (9.3 अरब डॉलर) हो गई। इसकी वजह मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में आई तेजी थी।
अमेरिका ने ईरान युद्ध से प्रभावित “ऊर्जा के मामले में कमजोर” देशों की मदद के लिए रूसी समुद्री तेल की खरीद की अनुमति देने वाली प्रतिबंधों में छूट को भी बढ़ा दिया है।
होमुर्ज जल्द खुला तो साल के आखिर तक मिलेगी राहत
इगोर सेचिन ने कहा कि सोच-समझकर बनाई गई सरकारी नीतियों की वजह से चीन इस संकट का सामना करने के लिए सबसे अच्छी तरह तैयार था, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि मलक्का, बाब अल-मंदेब और जिब्राल्टर होमुर्ज जैसे अन्य प्रमुख वैश्विक समुद्री रास्तों पर भी रुकावट का खतरा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही होमुर्ज जलमार्ग खुल जाता है, तो साल के आखिर तक तेल की कीमत 95 से 96 डॉलर प्रति बैरल होगी, एक साल में यह गिरकर 80 से 85 डॉलर हो जाएगी और 2027 की दूसरी छमाही तक बाजार की बुनियादी स्थितियां (market fundamentals) फिर से बहाल हो जाएंगी।
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