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सीमा पर तनाव के बीच RSS ने चीन को दिलाई 1989 के नरसंहार की याद

चीन की राजधानी बीजिंग के थियानमेन चौक पर साल 1989 में छात्रों के नेतृत्व में एक विशाल प्रदर्शन हुआ था।

chinaऑर्गेनाइजर ने अपने कवर पेज पर चीन में चार जून, 1989 को हुए नंसहार से जुड़ी ये तस्वीर जारी की है।

भारत-चीन सीमा विवाद के बीच आरएसएस के मुखपत्र ऑर्गेनाइजर ने अपने कवर पेज पर चीन में चार जून, 1989 को हुए नरसंहार से जुड़ी एक तस्वीर जारी की है। तस्वीर में चार युद्ध टैंक नजर आ रहे हैं। टैंक के सामने एक शख्स खड़ा है, जिसका कैप्शन लिखा गया, ‘थियानमेन चौक का पुर्नलोकन।’ इसका मतलब है कि इस घटना को फिर से याद करना।

चीन की राजधानी बीजिंग के थियानमेन चौक पर साल 1989 में छात्रों के नेतृत्व में एक विशाल प्रदर्शन हुआ था। प्रदर्शनकारी चीन की कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ सड़कों पर इकट्ठा हुए थे और देश में लोकतंत्र बहाल करने की मांग कर रहे थे। अपनी मांगों को लेकर छात्र कई सप्ताह तक प्रदर्शन करते रहे, मगर प्रदर्शन का जिस तरह से अंत हुआ वो चीन के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ था।

प्रदर्शनकारियों पर चीन ने भीषण बल प्रयोग किया। आंदोलन को कुचलने के लिए सड़कों पर टैंक तक उतार दिए गए। विभिन्न रिपोर्ट के मुताबिक इस कार्रवाई में सैंकड़ों प्रदर्शनकारियों की जान चली गई। हालांकि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ये संक्या 200 है और सात हजार से अधिक घायल हुए। इधर चीन में मौजूद एक ब्रिटिश पत्रकार ने दावा किया कि इस नंसहार में दस हजार से ज्यादा लोग मारे गए।

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दूसरी तरफ ऑर्गेनाइजर ने अपने एक लेख में कहा कि थियानमेन चौक पर मासूमी के नरसंहार से जुड़ी सभी स्मृति मिटाने के प्रयासों के बाजवूद चीन की कम्युनिस्ट सरकार की मुश्किलें बड़ी हुई हैं।  लेख में विभिन्न रिपोर्ट के हवाले से बताया गया कि कम्युनिस्ट शासन के भीतर तनाव काफी बढ़ गया है।

पूर्व अतिरिक्त सचिव, कैबिनेट सचिवालय, भारत सरकार और वर्तमान में चीन विश्लेषण और रणनीति केंद्र के अध्यक्ष जयदेव रानाडे ने साप्ताहिक ऑर्गेनाइजर को बताया कि चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) में रैंकिंग स्तर को लेकर असंतोष है। उन्होंने आगे कहा कि लाखों बेरोजगार श्रमिकों और विघटित सैनिकों व दिग्गजों के बीच अंसतोष है, जिनका पुनर्वास नहीं किया। या फिर इन लोगों को लगता है कि उन्हें उनका हक नहीं मिला है। कोरोना वायरस ने अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है और लाखों लोग बेरोजगार हो गए। कोरोना के बाद चीन में आर्थिक कठिनाइयां पैदा हुई है।

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