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रोहिंग्या बच्चे की दास्तां: गोली खाकर भी सैनिकों का जुल्म नहीं समझ रहा मासूम, बोला- गलती से मार दी होगी

अभी तक लाखों रोहिंग्या समुदाय के लोगों ने म्यांमार से भागकर बांग्लादेश में शरण ली है।

आलम मोहम्मद युनूस। (Photo Source: Video screengrab)

म्यांमार के राखीन क्षेत्र में सांप्रदायिक हिंसा फैलने के बाद लाखों रोहिंग्या समुदाय के लोगों ने अपना देश छोड़कर बांग्लादेश में शरण ली है। यूनिसेफ (जो रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए बांग्लादेश में हेल्थ सेंटर चला रहा है) के मुताबिक अगस्त महीने से अब तक करीब 3.20 लाख बच्चों ने म्यांमार छोड़कर बांग्लादेश में शरण ली है। यूनिसेफ ने दो रोहिंग्या बच्चों की दर्दभरी दास्तां का वीडियो अपने टि्वटर अकाउंट पर शेयर किए हैं। इसमें एक बच्चे को तो पैर में गोली भी लगी है। उस बच्चे का कहना है कि मुझे लगता है कि उन्होंने मुझे गलती से गोली मार दी, क्योंकि वो तो बड़ों को गोलियों मार रहे थे। वहीं 11 साल के बच्चे ने बताया कि सैनिक हमारे गांव में आए और लोगों पर गोलियां बरसाना शुरू कर दिया। अब इन दोनों बच्चों ने बांग्लादेश के शरणार्थी कैंप में शरण ली हुई है।

आलम मोहम्मद युनूस को पैर में गोली लगी है। मोहम्मद का अभी बांग्लादेश में यूनिसेफ के एक कैंप में इलाज चल रहा है। मोहम्मद का वीडियो यूनिसेफ ने टि्वटर पर शेयर किया है। वीडियो में मोहम्मद कह रहे हैं, ‘मेरे पैर में एक गोली लगी है। मुझे लगता है कि उन्होंने मुझे गलती से गोली मार दी। वे लोग बड़ों को गोलियां मार रहे थे।’ साथ ही बताया कि वे लोग(म्यांमार सैनिक) हमारे गांव आए और सब कुछ आग के हवाले कर दिया।’ वीडियो में साथ ही बताया गया है कि हस सप्ताह 12 हजार से ज्यादा रोहिंग्या बच्चे म्यांमार से भागकर बांग्लादेश में शरण ले रहे हैं।

यूनिसेफ के टि्वटर पर एक अन्य वीडियो भी शेयर किया गया है, 11 साल का मुंजाराली कहता है कि अगर मैं वहां रहता तो वे लोग मुझे भी मार देते। मुंजुराली अभी बांग्लादेश के एक कैंप में रह रहा है। उसने बताया, ‘सैनिक आते और लोगों को पर गोलियां चलाना शुरू कर दे। उन्होंने मेरी दो बहनों को भी मौत के घाट उतार दिया। इसलिए हम लोग वहां से भागकर यहां आ गए। यहां आकर हमें खुशी है, हम लोग आराम से यहां रह रहे हैं। घर पर हम लोग अच्छे से स्कूल नहीं जा पाते थे और ना ही ढंग से खेल पाते थे।’

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