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फ्रांस में लागू हुआ राइट टू डिसकनेक्ट, दफ्तर के समय के बाद नहीं देना होगा ईमेल इत्यादि का जवाब

फ्रांस के श्रम मंत्रालय की तरफ जारी बयान में कहा गया है, "ये कदम छुट्टी के समय के सम्मान में उठाया गया है....ताकि काम, परिवार और निजी जीवन के बीच संतुलन बना रहे।"

अब फ्रांस में ‘राइट टू डिस कनेक्ट’ लाया गया है जिससे कोई कंपनी अपने कर्मचारियों को पूरे हफ्ते काम करने के बाद कोई ईमेल नहीं कर सकेगी।

फ्रांस कर्मचारियों को अब दफ्तर के समय के बाद कामकाज से जुड़े ईमेल जवाब देने जरूरी नहीं होगा। एक जनवरी 2017 से लागू हो चुके ‘राइट टू डिसकनेक्ट’ कानून के तहत सभी फ्रांसीसी कामगार दफ्तर का समय खत्म होने के बाद और छुट्टी के दौरान अपने आधिकारिक ईमेल, स्मार्टफोन और दूसरे इलेक्ट्रानिक संचार माध्यमों से दूर रहने के लिए आजाद होंगे।

फ्रांस के श्रम मंत्रालय की तरफ जारी बयान में कहा गया है, “ये कदम छुट्टी के समय के सम्मान में उठाया गया है….ताकि काम, परिवार और निजी जीवन के बीच संतुलन बना रहे।” इस कानून के अनुसार जिन फ्रांसीसियों कंपनियों में 50 से ज्यादा कर्मचारी हैं उन्हें दफ्तर के कामकाज के समय के बाद ईमेल इत्यादि का जवाब देने से जुड़े अनुबंध को नवीनीकृत करना होगा। कंपनियों को ये सुनिश्चित करना होगा कि कर्मचारी दफ्तर से छुट्टी लेते समय ईमेल इत्यादि से दूर रहें।

नए कानून के अनुसार अगर किसी कंपनी का प्रबंधन और स्टाफ़ नए अनुबंध पर सहमत नहीं होता है तो उन्हें एक चार्टर जारी करना होगा कि कर्मचारी कब से नए नियमों के तहत काम करने लगेंगे। फ्रांसीसी कामगार संगठन बहुत पहले से “राइट टू डिसकनेक्ट” की मांग करते रहे हैं। कामगार संगठनों के अनुसार डिजिटल टेक्नोलॉजी ने “अघोषित कामकाज का विस्फोट” कर दिया है और कामगारों को अपने काम के घंटों के बाद भी दफ्तर के कामकाज करना पड़ता है।

मानव संसाधन (एचआर) निदेशक के तौर पर काम करने वाली मैरी पियरे फ्लूरी ने सीएनएन से कहा कि कामगारों को काम के बोझ से बचाने के लिए ये कदम जरूरी था। मैरी ने कहा कि ये कदम कर्मचारियों के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी था। कुछ फ्रांसीसी कंपनियां पहले ही ऐसे नियम लागू कर चुकी हैं। ऐसी कंपनियां दफ्तर के समय के बाद कंपनी द्वारा दिए गए इलेक्ट्रानिक गैजेट के इस्तेमाल पर रोक लगा चुकी हैं। वहीं कुछ कंपनियां रात को किसी भी तरह के मेल नहीं भेजतीं।

जब ये कानून फ्रांस की नेशनल असेंबली में पेश किया तो सांसद बिनोयट हेमॉन ने मीडिया से कहा था कि सभी रिसर्च दिखा रहे हैं कि  पिछले कुछ सालों में काम का तनाव कम नहीं हुआ है और आगे भी इसमें किसी तरह की कमी की उम्मीद नहीं दिख रही है। हेमॉन ने बीबीसी से कहा कि कर्मचारी शारीरिक रुप से तो ऑफिस को छोड़ देते हैं, लेकिन वो अपना काम नहीं छोड़ते हैं। वो एक कुत्ते की तरह इलेक्ट्रॉनिक सामानों से चिपके रहते हैं। नए कानून के अनुसार कंपनियां कर्मचारियों की नीतियों को नजरअंदाज करती है और कानून तोड़ने के लिए उनपर कोई भी कार्रवाई नहीं की जाती।

फ्रांस में साल 2000 के ही प्रति सप्ताह 35 घंटे कामकाज की सीमा तय कर दी गई है। हालांकि बाद में कुछ क्षेत्रों को इस नियम को लचीली ढंग से लागू करने की रियायत दी गई।  फ्रांस की अर्थव्यवस्था की विकास की रफ्तार काफी धीमी है। इंटरनेशनल मोनेटरी फंड के अनुसार इस साल भी फ्रांस की अर्थव्यवस्था 1.3 प्रतिशत सालाना की दर से विकसित होगी। साल 2016 में भी देश की विकास दर करीब इतनी ही थी।

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