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जंग ने किया अलग, 65 साल बाद सिर्फ 11 घंटों के लिए मिलेंगे बिछड़े हुए परिवार

वर्ष 1950-53 के कोरियाई युद्ध में अलग हुए दक्षिणी कोरियाई परिवारों का एक समूह उत्तर कोरिया में रहने वाले रिश्तेदारों से मिलने के लिए सोमवार को माउंट कुमगांग के लिए रवाना हुआ।

कोरियाई युद्ध की फाइल फोटो

वर्ष 1950-53 के कोरियाई युद्ध में अलग हुए दक्षिणी कोरियाई परिवारों का एक समूह उत्तर कोरिया में रहने वाले रिश्तेदारों से मिलने के लिए सोमवार को माउंट कुमगांग के लिए रवाना हुआ। पुनर्मिलन की बाट जोह रहे दक्षिण कोरिया के आधे से अधिक लोग 80 या उससे अधिक उम्र के हैं। इस दौरान इन सबमें सबसे उम्रदराज शख्स 101 वर्षीय बाक सुंग-गुयु हैं जो उत्तर कोरिया में अपनी बहू और पोती से मिलेंगे। दशकों के अलगाव के बाद हो रहीं इन मुलाकातों की अवधि केवल 11 घंटे ही है। तीन दिनों के पुनर्मिलन कार्यक्रमों में ये समूहों में मिलेंगे और साथ में निजी मुलाकातें भी होंगी।  सिन्हुआ के अनुसार, बिछुड़े परिवार के सदस्यों के लिए यह आमने-सामने मुलाकात करने का एकमात्र अवसर है। दक्षिण कोरिया के परिवार रविवार को सोक्चो में पुनर्मिलन के लिए पंजीकरण करने के लिए इकट्ठे हुए और इस दौरान उनके स्वास्थ्य की भी जांच की गई। यह पुनर्मिलन समारोह सोमवार से बुधवार तक चलेगा।

आपको बता दें कि कोरियाई युद्ध के दिनों में अधिकार-क्षेत्र बार-बार बदलते रहे। अन्ततः सीमा स्थिर हुई।  उत्तर कोरिया और चीनी सेनाएं दक्षिण कोरिया, अमेरिका, कॉमनवेल्थ तथा संयुक्त राष्ट्र की सेनायें कोरियाई युद्ध शीत युद्ध काल में लड़ा गया पहला महत्वपूर्ण युद्ध था। एक तरफ उत्तर कोरिया था जिसका समर्थन सोवियत संघ तथा साम्यवादी चीन कर रहे थे, दूसरी तरफ दक्षिण कोरिया था जिसकी रक्षा अमेरिका कर रहा था। युद्ध अन्त में बिना निर्णय ही समाप्त हुआ किन्तु जन क्षति तथा तनाव बहुत बढ़ गया था। कोरिया-विवाद सम्भवतः संयुक्त राष्ट्र संघ के शक्ति-सामर्थ्य का सबसे महत्वपूर्ण परीक्षण था। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के विद्वान शूमा ने इसे “सामूहिक सुरक्षा परीक्षण” की संज्ञा दी है।

आइएनएस के इनपुट के साथ।

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