ताज़ा खबर
 

G-20 शिखर सम्मेलन से पहले भारत ने गरमाया मुद्दा, कहा: आर्थिक सुधारों को राजनीति से अलग रखना चाहिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशों में रखे कालेधन को वापस लाने के लिए दुनिया के देशों से सहयोग की मजबूत वकालत की है। कालेधन की समस्या से निपटने के उपाय तलाशने के भारी आंतरिक दबाव के बीच शनिवार को यहां जी-20 देशों का शिखर सम्मेलन शुरू हो गया। मोदी पहली बार शिखर सम्मेलन में जी-20 […]

Author November 16, 2014 08:22 am
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशों में रखे कालेधन को वापस लाने के लिए दुनिया के देशों से सहयोग की मजबूत वकालत की है। (फोटो: भाषा)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशों में रखे कालेधन को वापस लाने के लिए दुनिया के देशों से सहयोग की मजबूत वकालत की है। कालेधन की समस्या से निपटने के उपाय तलाशने के भारी आंतरिक दबाव के बीच शनिवार को यहां जी-20 देशों का शिखर सम्मेलन शुरू हो गया।

मोदी पहली बार शिखर सम्मेलन में जी-20 के नेताओं से मिले। इस दौरान उन्होंने कहा कि विदेशों में रखे कालेधन को वापस लाना उनकी सरकार की प्राथमिकता है। इसके साथ ही उन्होंने यह संदेश भी दिया कि आर्थिक सुधारों को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए।

जी-20 की दो दिवसीय बैठक ऐसे समय हो रही है जब बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कर चोरी के लिए लक्जमबर्ग के साथ करों को कम करने के लिए सांठगांठ की जा रही है और दूसरी तरफ भ्रष्टाचार रोकने की वकालत करने वाले प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से उनकी सीमाओं के बाहर अवैध धन के प्रवाह को रोकने का आग्रह कर रहे हैं।

शिखर बैठक के मेजबान देश आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टॉनी एबट ने वादा किया है कि सम्मेलन वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 2,000 अरब डालर जोड़ने की पहल करने में सफल रहेगा। इससे वैश्विक आर्थिक वृद्धि में दो फीसद विस्तार होगा और लाखों रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
पांच देशों के ब्रिक्स समूह के नेताओं के बीच एक अनौपचारिक बैठक में मोदी ने कालेधन को वापस लाने के मकसद को हासिल करने के लिए नजदीकी वैश्विक समन्वय की जोरदार वकालत की। मोदी ने इस तरह से जी-20 शिखर सम्मेलन शुरू होने से पहले ही कालेधन के मुद्दे को गरमा दिया है। मोदी विदेशों में रखे कालेधन की एक-एक पाई लाने की पहले ही प्रतिबद्धता जता चुके हैं।

प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स नेताओं चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा और ब्राजील की राष्ट्रपति डिल्मा रूसेफ से कहा कि विदेशों में रखा कालाधन वापस देश में लाना हमारी मुख्य प्राथमिकता है। मोदी ने कालेधन पर दुनिया के देशों के बीच नजदीकी समन्वय स्थापित किए जाने पर जोर देते हुए विदेशों में रखे इस अवैध धन को सुरक्षा के लिए भी चुनौती बताया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने पत्रकारों को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि ऐसा पहली बार हुआ है जब कालेधन को लेकर सुरक्षा क्षेत्र पर गौर किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता संभालने के साथ ही लगातार कहते रहे हैं कि कालाधन वापस लाना उनकी प्राथमिकता है और उनकी सरकार ने सत्ता संभालते ही पहले ही दिन कालेधन का पता लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआइटी) के गठन को मंजूरी दी।

मोदी ने बाद में जी-20 के अपने साथी नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि सुधार प्रक्रिया के समक्ष गतिरोध पैदा होना लाजिमी है। उन्होंने सुधारों को राजनीतिक दखलंदाजी से अलग रखने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि सुधारों से प्रक्रियाओं को सरल होना चाहिए और प्रशासन संचालन के तौर-तरीकों में भी सुधार आना चाहिए।

जी-20 देशों के नेताओं के सम्मान में आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टॉनी एबट ने क्विंसलैंड संसद भवन में भोज का आयोजन किया था। इस मौके पर सभी नेता बिना सहायकों के मिले। भोज का आयोजन दोपहर में ब्रिस्बेन सम्मेलन केंद्र में दुनिया के विकसित और विकासशील देशों के समूह जी-20 का शिखर सम्मेलन शुरू होने से पहले किया गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि सुधारों को लोगों के जरिए ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए, इसे चालाकी के साथ गुपचुप तरीके से नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सुधारों को जन-केंद्रित और जन-चालित होना चाहिए। दुनियाभर में यह धारणा है कि सुधार सरकार का कार्यक्रम है और यह जनता पर बोझ के समान है, इस स्थिति को बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सुधार एक बहुस्तरीय प्रक्रिया है और इसे संस्थागत रूप दिया जाना चाहिए। इसे प्रौद्योगिकी के साथ बढ़ाया जाना चाहिए और इससे समस्याओं को जड़ से दूर करने में सक्षम होना चाहिए।

जी-20 शिखर सम्मेलन के मेजबान देश आस्ट्रेलिया ने कर चोरों के खिलाफ कारवाई के बारे में शुक्रवार को काफी आक्रामक रुख अपनाया। भारत भी दुनिया में कर चोरों की पनाहगाह बने क्षेत्रों के खिलाफ जी-20 द्वारा कड़ी कारवाई चाहता है।

कालेधन के खिलाफ भारत ने आवाज ऐसे समय उठाई है जब भ्रष्टाचार का विरोध करने वाले चाहते हैं कि जी-20 देशों को सार्वजनिक रजिस्टर बनाकर सीमापार अवैध धन के प्रवाह को रोकना चाहिए। रजिस्टर में उन लोगों का खुलासा होना चाहिए जो कंपनियों अथवा व्यवसाय के मालिक हैं, अथवा उस पर नियंत्रण रखते हैं, कारोबार से फायदा उठाते हैं, लेकिन अपनी पहचान छुपाने के लिए मुखौटा कंपनियों का इस्तेमाल करते हैं और कर देने से बचते हैं।
दुनिया के प्रत्येक महाद्वीप का प्रतिनिधित्व करने वाले नागरिक समाज के 24 नेताओं के संगठन ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने जी-20 नेताओं को एक खुला पत्र भेजा है जिसमें उनसे भ्रष्टाचार रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई करने और वैश्विक प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने का आग्रह किया गया है। पारदर्शिता और स्पष्टता के सिद्धांत स्थापित करना जी-20 के भ्रष्टाचार रोधी कार्य समूह का केंद्र बिंदु रहा है और यह लंबे समय से उसके एजंडे में है।
एबट ने कहा-हां, हम मुक्त व्यापार चाहते हैं और हम ऐसा करेंगे। हां, हमें अधिक बुनियादी सुविधाओं की जरूरत है और हम इसका निर्माण करेंगे। इस कमरे के आसपास एकत्रित लोग, दुनिया के बहुत शक्तिशाली और प्रभावशीली लोग हैं।

एबट ने यह बात अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की उपस्थिति को देखते हुए कही। उन्होंने कहा-हम हर समय सहमत होने में कामयाब नहीं हो सकते हों लेकिन मुझे उम्मीद है कि हम कम से कम एक दूसरे के समक्ष खुलकर बात कर सकते हैं।

 

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App